पुरातन संस्कृति, राउत नृत्य, दोहा और गीत गाथा को संरक्षित करने आयोग गठन की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ यादव समाज के प्रमुखों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ की पुरातन संस्कृति राउत नाचा, बांस गीत गाथा के दोहा और गीत गाथा को संरक्षित करने के लिए अकादमी गठन की मांग की। इसके साथ समाजजनों ने सीएम को आठ सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। जिस पर सीएम साय ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस अवसर पर पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को राउत जैकेट, खुमरी पहनाकर, शाल, लाठी, स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा भी उपस्थित रहे।
बताते चलें कि लाखों की संख्या में छत्तीसगढ़ के नगर और गावों में निवासरत यादव समाज छत्तीसगढ़ की संस्कृति तथा गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण में महती भूमिका निभा रही है। समाज की वर्षों से कुछ बिंदु पर सरकार से मांग रही है जिस पर आज तक निराकरण नहीं हो पाया है। जैसे छत्तीसगढ़ की पुरातन संस्कृति राउत नृत्य और बांस गीत गाथा के दोहा और गीत गाथा को संरक्षित करने के लिए अकादमी का गठन। समाज के बुजुर्ग कलाकारों को कला प्रोत्साहन राशि दी जाए। उसी तरह वन क्षेत्र में निवासरत यादव परिवारों को आज भी वन विभाग द्वारा पट्टा नहीं दिया गया। वही आए दिन राजस्व, पुलिस और वन विभाग द्वारा किसी न किसी बहाने परेशान किया जाता है। समाज की यह भी मांग है कि छत्तीसगढ़ में जनसंख्या अनुपात के अनुसार यादवों को सरकार के विभिन्न निकायों में भागीदारी सुनिश्चित की जाए और आगामी दिनों में होने वाले नगर निकाय, जिला पंचायत चुनाव में भाजपा से जुड़े यादवों को महापौर, अध्यक्ष, सदस्य, पार्षद की टिकिट दी जाए या मनोनयन की जाए।
उसी प्रकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के केंद्रीय सूची में क्रमांक एक में यादव, राउत के बाद रावत को जोड़ने के लिए राज्य सरकार तुरंत कार्यवाही करें। केंद्रीय सूची में "रावत" नही जुड़े होने के कारण छत्तीसगढ़ यादव समाज के लाखों युवाओं को, केंद्रीय शिक्षा और रोजगार में बहुत परेशानी हो रही है।
मांग पत्र में यह भी है कि गोठानों में उसी गांव के यादव बंधुओं जो की गाय चराने का कार्य करते है को गोसेवक के रूप में नियुक्त कर हर माह मानसेवी राशि दी जाए। वहीं बेसहारा गाय, बछड़ा, बैल, भैंस की देखभाल के लिए प्रत्येक जिला में अभ्यारण्य बनाई जाए और उन्हें वहां रखा जाए उनकी चारा पानी , इलाज की सुचारू व्यवस्था की जाए। साथ ही गोपालक यादव परिवार को दुग्ध व्यवसाय के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर दस लाख तक की सहकारी बैंकों से ऋण दी जाए जिसका नियम कानून सरल हो ताकि हर यादव परिवार जो दुग्ध व्यवसाय कर रहे हो उन्हे इसका लाभ मिल सके।
छत्तीसगढ़ यादव समाज की यह भी मांग है कि डेयरी संचालित व्यवसाई अपने हिसाब से रेट निर्धारित कर यादवों से दूध खरीदते हैं और यादवों से क्रय दूध को दोगने दामों में बिक्री कर देते है, 30 रुपये में खरीद कर 60 रुपये में बेचकर बिचौलिये दोगुना मुनाफा कमा रहे है, जबकि दाना, चारा और अन्य व्यवस्था सभी महंगी हो गई है और यादवों को विशेष रूप से कुछ फायदा नहीं हो रहा है पर दूसरा धंधा नही होने और वंशानुगत कार्य होने के कारण मजबूरी में गोपालन कर रहे हैं। शासन छत्तीसगढ़ में दूध उत्पादक यादवों को दूध का प्रति लीटर 40 से 45 रुपये मिले ऐसा नियम बनाये कड़ाई से पालन कराए। इन आठ सूत्रीय मांग पत्र भारतीय यादव महासभा छत्तीसगढ़ के बैनर पर रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर संभाग के प्रमुख पदाधिकारीगण प्रदेश अध्यक्ष डा सोमनाथ यादव के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को सौंपा। प्रतिनिधि मंडल में सर्वश्री माधव लाल यादव, अलखराम यादव, एसडी यादव, ,भगत यादव, राजू यादव, श्रीराम सीरिया यादव, संतोष यादव, रामशरण यादव, शिवशंकर यादव, अशोक यादव, राजेश यादव, सूरज यादव, जमुना यादव, शिवनाथ यादव, नीरज यादव, लक्ष्मी यादव, जितेंद्र यादव, दुजराम यादव, श्रवण यदु, रमाकांत यादव, हितेश यादव, प्रीतम यादव, अजय गोपाल, संजय यादव, हरीश यादव, कमलेश यादव, रामाधार यादव, दुर्गा यादव, मुकेश यादव, बंटी यादव, गोवर्धन यदु, राकेश यादव, उतरा यादव, शिव कुमार यादव, दिलीप यादव, निरंजन यादव, जीतू यादव, श्रेयश यादव, हर्ष यादव, हर्ष हिंद यादव, शेखर यादव, सतीश यादव प्रमुख थे।