वैज्ञानिक गर्भ संस्कार पर वेबीनार आज शाम 5 बजे... जानिए इसे महत्व और जरूरत को
2024-10-05 12:33 PM
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रायपुर। आपकी नई नई शादी हुई है और आप बच्चे के लिए प्लानिंग कर रहे या आपकी पत्नी गर्भवती है तो आपको यानी बच्चे के माता-पिता दोनों को गर्भसंस्कार के महत्व को जानना बेहद जरूरी है। गर्भसंस्कार भारतीय शास्त्र के अनुसार 16 संस्कारों में से पहले तीन संस्कारों गर्भाधान संस्कार, पुसवन संस्कार और सीमंतोन्नयन संस्कार का संयोजन है। गर्भसंस्कार वैदिक विज्ञान पर आधारित है। आज की हमारी युवा पीढ़ी इस संस्कार से दूर होती जा रही है। भागमभाग भरी जिंदगी और तनाव को हम अपने दैनिक दिनचर्चा में शामिल कर लेते है, और फिर उससे दूर नहीं जा पाते। युवा पीढ़ी को इस संस्कार से जोड़े रखने के लिए राजधानी की डॉ मानसी पत्तेवार शनिवार, 5 अक्टूबर की शाम 5 बजे ‘वैज्ञानिक गर्भ संस्कार’ पर आनलाइन वेबीनार आयोजित कर रही है। वेबीनार में शामिल होने के लिए https://www.drmanasipattewar.com/wlp/garbhasanskar लिंक पर क्लिक कर सकते है।
डॉ मानसी पत्तेवार ने बताया कि गर्भ संस्कार का आध्यात्मिक महत्व तो है ही वैज्ञानिक महत्व भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने रिसर्च में पाया है कि गर्भ संस्कार एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे आने वाली पीढ़ी संस्कारवान हो सकती है। शोध के अनुसार, एक नवजात शिशु में 100 बिलियन न्यूरॉन विकसित होते हैं। मस्तिष्क के विकास की प्रक्रिया गर्भावस्था के 16वें दिन से शुरू होती है और प्रसव तक जारी रहती है। इस प्रक्रिया के दौरान, हर मिनट लगभग 2.5 लाख न्यूरॉन विकसित होते हैं।
डॉ मानसी पत्तेवार ने आगे बताया कि क्योंकि बच्चे के मस्तिष्क का 90% विकास माँ के गर्भ में ही हो जाता है। इसलिए बच्चा हमारे विचारों, गतिविधियों और बाहरी वातावरण से प्रभावित होता है। गर्भावस्था के दौरान सिखाए गए गुणों को गर्भसंस्कार के रूप में माना जाता है। गर्भसंस्कार का अभ्यास करना, 90 वर्षों के विकास कार्य को मात्र 9 महीनों में पूरा करने के समान है।