पहाड़ी कोरवा महिला ने एक साथ तीन बच्चों को दिया जन्म, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ
2026-09-08 09:14 AM
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रायपुर। आदिवासी बहुल और दूरस्थ क्षेत्रों में जरूरतमंद मरीजों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड की अति-जोखिम वाली गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला बसंती ने जिला अस्पताल अंबिकापुर में तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। फिलहाल मां और तीनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार और देखभाल की जा रही है।
जानकारी के अनुसार बसंती गर्भावस्था के दौरान जिला अस्पताल अंबिकापुर पहुंची थी, लेकिन किसी कारणवश बिना उपचार कराए ही अपने गांव वापस लौट आई थी। महिला के अति-जोखिम वाली गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला तत्काल सक्रिय हुआ। महिला को समय पर आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों ने तैयारियां शुरू कीं।
दूरस्थ और आदिवासी अंचल में रहने वाली गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में बसंती के मामले में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले, मितानिन, 102 एंबुलेंस टीम और अस्पताल के चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। सभी संबंधित टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समय पर चिकित्सकीय निगरानी और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिलने के बाद बसंती ने तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। एक साथ तीन बच्चों के जन्म के बाद अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मां तथा तीनों नवजात की स्थिति पर लगातार नजर रखी। वर्तमान में चारों की हालत स्वस्थ बताई जा रही है और उन्हें चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अति-जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के मामलों में समय पर पहचान और नियमित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसी महिलाओं को प्रसव के दौरान संभावित जोखिमों को देखते हुए समय पर उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना जरूरी होता है। इसके लिए ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले मैदानी स्वास्थ्यकर्मी, मितानिन और एंबुलेंस सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया कि अति-जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित निगरानी और तत्काल रेफरल सुरक्षित मातृत्व के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में रहने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व की सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने बसंती के मामले में स्वास्थ्य अमले द्वारा दिखाई गई सजगता और तत्परता की सराहना की। साथ ही 102 एंबुलेंस सेवा, मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अस्पताल के चिकित्सकों के बीच हुए समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस तरह के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
बसंती के तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म देने की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की सराहना हो रही है। यह मामला बताता है कि दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और विभागीय अमले की सक्रियता गर्भवती महिलाओं के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मैदानी स्तर पर गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, जोखिम की पहचान और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफरल की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि भौगोलिक दूरी या अन्य चुनौतियों के बावजूद जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा मिले और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सके।