छत्तीसगढ़
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और कोटमसर गुफा पर्यटकों के लिए बंद
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की पहचान माने जाने वाले प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता, गुफाएं, झरने और घने जंगल हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हालांकि, बरसात के मौसम में कई स्थानों तक पहुंचना जोखिमपूर्ण हो जाता है, जिसके चलते हर साल एहतियातन उद्यान को कुछ महीनों के लिए बंद रखा जाता है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: निजी अस्पतालों में भी बनेगा आभा कार्ड
ऑटो चालकों पर यातायात पुलिस की सख्ती, एक दिन में 100 से अधिक चालान
स्वच्छता सर्वे की तैयारियों पर सवाल, चार तरह के कचरे का पृथक्करण अधूरा
स्थिति यह है कि शहर में चार कंपार्टमेंट वाले कचरा वाहनों की भी कमी है। नगर निगम के पास फिलहाल केवल 25 ऐसी गाड़ियां हैं, जबकि 70 वार्डों के हिसाब से इनकी संख्या पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। कचरे के वैज्ञानिक निपटान और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई यह व्यवस्था अभी जमीनी स्तर पर कमजोर नजर आ रही है। नगर निगम ने 1.29 लाख डस्टबिन की खरीद के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है, लेकिन इसे अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। इसी तरह नए कचरा वाहनों की खरीद और मौजूदा वाहनों में बदलाव का प्रस्ताव भी लंबित है। इसके कारण शहर में अभी भी अधिकांश स्थानों पर केवल दो तरह का कचरा गीला और सूखा ही अलग किया जा रहा है।
कई वार्डों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक घरों तक पर्याप्त डस्टबिन और संग्रहण व्यवस्था नहीं पहुंचेगी, तब तक चार श्रेणी वाला सिस्टम प्रभावी नहीं हो पाएगा। इस मुद्दे पर महापौर पूजा विधानी ने कहा कि डस्टबिन खरीदने की योजना तैयार की जा रही है और एमआईसी में प्रस्ताव आने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कचरा गाड़ियों को चार कंपार्टमेंट में बदलने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कचरा अलग-अलग संग्रहित किया जा सके।
परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी में है तो दूसरे को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्तिः होईकोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है, यदि मृतक शासकीय सेवक के परिवार का कोई भी सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। डिवीजन बेंच ने कहा, नीति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि नौकरी पेशा सदस्य यदि अलग रह रहा हो तो दूसरे को छूट दी जाए।
याचिकाकर्ता हेनरी रंगारी (21 वर्ष) के पिता स्व अशोक कुमार रंगारी कुरुद तहसील कार्यालय में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत थे, जिनका 5 नवंबर 2024 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद हेनरी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। जांच के दौरान पता चला, मृतक का एक बड़ा बेटा, हेनरी का सौतेला भाई वीरेंद्र बहादुर रंगारी पहले से ही सरकारी नौकरी में है और जगदलपुर में पदस्थ है। इसी आधार पर जिला स्तरीय अनुकंपा नियुक्ति समिति ने हेनरी का दावा निरस्त कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनोज परांजपे और कबीर कलवानी ने कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए कहा, हेनरी का बड़ा सौतेला भाई वीरेंद्र वर्ष 2006 से ही अपने परिवार के साथ अलग जगदलपुर में रह रहा है। वह अपने पिता पर आश्रित नहीं था और उसने हेनरी को अनुकंपा नियुक्ति देने पर अपनी अनापत्ति भी दे दी थी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य संकट में घिरे आश्रित परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता देना है। वर्तमान में हेनरी, उसकी विधवा मां मोतिम बाई और बहन पूरी तरह बेसहारा हो चुके हैं, इसलिए शासकीय सेवा में होने के बावजूद अलग रह रहे भाई को परिवार का हिस्सा मानकर हेनरी का हक मारना न्यायसंगत नहीं है। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए उप महाधिवक्ता प्रसून भादुड़ी ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के दलीलों का कड़ा विरोध किया।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने पुराने ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा, अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती नियमों का एक अपवाद है। इसे कानूनी अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति नीति, 2013 के क्लॉज 6(ए) के तहत यदि मृतक का कोई भी बेटा या बेटी शासकीय सेवा में है, तो यह नियम लागू नहीं होता है। नीति में इस बात की कोई छूट नहीं दी गई है कि वह सदस्य अलग रहता है या परिवार की आर्थिक मदद नहीं करता। सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए डिवीजन बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया है।
आईआईटी भिलाई और फ्रांस के सेंट्रेल नैनटेस के बीच शिक्षा व शोध के लिए करार
रायपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई ने वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देते हुए फ्रांस के प्रतिष्ठित संस्थान सेंट्रेल नैनटेस (École Centrale de Nantes) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 14 से 16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ (भारतीय शिक्षा इकोसिस्टम के लिए ग्लोबल एक्सेलेरेशन) कार्यक्रम के दौरान संपन्न हुआ।
समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक, शोध, पेशेवर तथा सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करना है। इसके माध्यम से फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं तथा अंतरराष्ट्रीय अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है।
समझौते के तहत दोनों संस्थान फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम, छात्र विनिमय, संयुक्त शोध गतिविधियों, बहु-राष्ट्रीय एवं बहु-संस्थागत परियोजनाओं, सेमिनारों तथा शैक्षणिक बैठकों में सहभागिता को प्रोत्साहित करेंगे। इसके अलावा शैक्षणिक सामग्री और अन्य अकादमिक सूचनाओं के आदान-प्रदान, विशेष अल्पकालिक शैक्षणिक कार्यक्रमों, समर रिसर्च प्रोग्राम तथा विदेश अध्ययन कार्यक्रमों के साथ संयुक्त एवं दोहरी डिग्री पाठ्यक्रमों की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा।
आईआईटी भिलाई और सेंट्रेल नैनटेस के बीच यह साझेदारी उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर पर सीखने, अनुसंधान करने और ज्ञान साझेदारी के नए अवसर प्राप्त होंगे।
दंतेवाड़ा को मिली डेढ़ करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात
रायपुर। दंतेवाड़ा जिले के नगरीय क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं के विस्तार और आधारभूत अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने 1 करोड़ 49 लाख 11 हजार रुपए की लागत से निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। लोकार्पित कार्यों में आधुनिक चौपाटी, व्यावसायिक गुमटियां, आकांक्षी शौचालय तथा नवीन आंगनबाड़ी भवन शामिल हैं। इन सुविधाओं से स्थानीय नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा तथा महिला एवं बाल विकास गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा एक प्रमुख धार्मिक नगरी के रूप में विकसित हो रहा है। आने वाले समय में यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने जिला प्रशासन को दंतेवाड़ा नगर और मंदिर क्षेत्र के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।
वन मंत्री कश्यप ने नगर के सीवरेज प्लांट से निकलने वाले पानी के सीधे नदी में प्रवाहित होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल को उपचारित (ट्रीटमेंट) करने के बाद ही नदी में छोड़ा जाए अथवा आवश्यकतानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने भैरम बाबा मंदिर के समीप नदी तट पर हो रहे कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग को शीघ्र पिचिंग कार्य की योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।
नगरपालिका द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए मंत्री कश्यप ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि नगर के प्रमुख चौक-चौराहों और मार्गों का नामकरण स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं महापुरुषों के नाम पर किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। इसके अलावा दंतेवाड़ा शहर में एक आकर्षक घड़ी चौक (क्लॉक टॉवर) का निर्माण कराया जाएगा। बच्चों और युवाओं के मनोरंजन तथा खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्विमिंग पूल परिसर में वाटर स्लाइडर की सुविधा विकसित करने की भी घोषणा की गई।
ब्रेक फेल होने से ऑक्सीजन टैंकर पलटा, केशकाल घाट में हड़कंप
शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान गायत्री और भोजन मंत्र अनिवार्य
विभाग ने विद्यार्थियों, पालकों, शिक्षकों और नागरिकों से अपील की है कि वे केवल शासन और विभाग द्वारा जारी अधिकृत सूचनाओं पर ही विश्वास करें। साथ ही इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक खबरों से सावधान रहने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि एक जुलाई से स्कूल खोलने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
नारी राग-रंग महोत्सव: महिलाओं की सृजनात्मकता और आत्मविश्वास को मिला नया मंच
समापन समारोह के मुख्य अतिथि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) हरीश दुहन एवं श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा शशि दुहन रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास सहित श्रद्धा महिला मंडल की उपाध्यक्षागण अनीता फ्रैंकलिन, इप्सिता दास एवं शुभश्री महापात्र उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारीगणों और उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक शिरकत की।
महोत्सव के दूसरे और अंतिम दिन की प्रतियोगिताएं बेहद रोमांचक रहीं, जिसमें समूह गायन, समूह नृत्य, स्टैंड-अप कॉमेडी, मिमिक्री और लघु नाटिकाओं (स्किट) का मंचन किया गया। प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियों से न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि आधुनिक समाज में नारी शक्ति के विविध आयामों को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने इस आयोजन की सफलता की सराहना की। उन्होंने कहा, “नारी राग-रंग महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के भीतर छिपी अद्वितीय क्षमताओं को पहचानने और उन्हें आत्मविश्वास से भरने का एक अभियान है। प्रतिभागियों के उत्साह ने यह प्रमाणित कर दिया है कि जब महिलाओं को उचित अवसर मिलता है, तो वे सृजनात्मकता के नए कीर्तिमान स्थापित करती हैं। एसईसीएल भविष्य में भी महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके कौशल को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के आयोजन निरंतर जारी रखेगा।”
कार्यक्रम के समापन सत्र में विभिन्न श्रेणियों की प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, आयोजन को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निर्णायक मंडल के सदस्यों को भी स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।
यह दो दिवसीय महोत्सव महिलाओं की रचनात्मकता, संगठन क्षमता और नेतृत्व कौशल के एक उत्कृष्ट संगम के रूप में उभरा है। इस सफल आयोजन ने न केवल एसईसीएल परिवार के बीच एकता की भावना को सुदृढ़ किया है, बल्कि नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक नई ऊर्जा का संचार भी किया है।
विश्व रक्तदाता दिवस पर सेक्टर-9 अस्पताल में दो दिवसीय मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन
रायपुर। विश्व रक्तदाता दिवस-2026 के अवसर पर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएनएच एंड आरसी) के ब्लड सेंटर द्वारा ‘‘मानवता की एक बूंद–रक्तदान, जीवनदान’’ थीम पर दो दिवसीय मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। अभियान के प्रथम दिवस अस्पताल कर्मियों और स्वैच्छिक रक्तदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी से 29 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।
रक्तदान शिविर का शुभारंभ भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार ने किया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेन्द्र ठाकुर तथा डॉ. उदय कुमार सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान मानव रक्त समूहों की खोज करने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. कार्ल लैंडस्टाइनर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं को उनके जीवनरक्षक योगदान के लिए ट्रॉफी और पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया।
रक्तदान के क्षेत्र में निरंतर सहयोग देने वाली विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं को भी स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने तथा जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में इन संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा कांगो, ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ. निली एस. कुजूर, वरिष्ठ सलाहकार (पैथोलॉजी) डॉ. प्रिया साहू, सलाहकार (ट्रांसफ्यूजन सर्विसेज) डॉ. दीपक कुमार दासमहापात्र तथा सलाहकार (पैथोलॉजी) डॉ. प्रतीक शिवप्पा सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
रक्तदान शिविर के सफल आयोजन में ब्लड सेंटर की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उप प्रबंधक राजीव शर्मा, सहायक प्रबंधक रीता भटनागर और स्टाफ नर्स शैल कुमारी सिंह सहित टीम के सदस्यों ने कार्यक्रम के संचालन में सक्रिय योगदान दिया। वहीं रक्तदाताओं की स्क्रीनिंग, रक्त संग्रहण और प्रसंस्करण से संबंधित तकनीकी कार्य मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट शाजी, सुधीर कुमार पाण्डेय, अजय कुमार आर्य तथा जूनियर मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट संदीप कुमार पाण्डेय, मीनाक्षी चरण, कुलदीपक तिवारी और जितेन्द्र कुमार ने दक्षतापूर्वक संपादित किए।
जन्म से बंद थे मलद्वार और मूत्र मार्ग, दो सफल ऑपरेशनों ने बदली अरुलेश की जिंदगी
जगदलपुर : बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के ग्राम छापर भानपुरी निवासी तीन वर्षीय अरुलेश बघेल के जीवन में अब खुशियों ने दस्तक दे दी है। जन्म से ही मलद्वार और मूत्र मार्ग बंद होने जैसी गंभीर जन्मजात समस्या से जूझ रहे इस मासूम के लिए बीते कुछ वर्ष बेहद कठिन रहे, लेकिन समय पर चिकित्सा और विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रयासों ने उसकी जिंदगी बदल दी।
अरुलेश के पिता तुलसीदास बघेल बताते हैं कि बेटे की बीमारी उनके परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण थी। जन्म से ही मलद्वार और पेशाब का रास्ता बंद होने के कारण बच्चे को लगातार शारीरिक तकलीफों का सामना करना पड़ता था। अपने बेटे को पीड़ा में देखकर माता-पिता भी बेहद व्याकुल रहते थे।
विगत वर्ष फरवरी 2025 में स्वास्थ्य केन्द्र में जांच के दौरान अरुलेश की गंभीर स्थिति का पता चला, जिसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। वहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जून 2025 में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसके मलद्वार का पहला सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद बच्चे की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला और उसके जीवन में नई उम्मीद जगी।
इसके बाद चिकित्सकों की निगरानी में उपचार जारी रहा। विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार फरवरी 2026 में रायपुर में ही अरुलेश के मूत्र मार्ग का दूसरा ऑपरेशन किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। दोनों जटिल ऑपरेशन के साथ ही लगातार उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श सहित समुचित देखभाल के फलस्वरूप अब अरुलेश स्वस्थ जीवन जी रहा है और सामान्य बच्चों की तरह खेल-कूद तथा दैनिक गतिविधियां कर पा रहा है।
तुलसीदास बघेल कहते हैं कि बेटे को स्वस्थ देखकर पूरे परिवार को सुकून मिला है, सबसे ज्यादा खुशी अरूलेश की दादी को मिली है जो उसके साथ ज्यादा समय बिताती है। उन्होंने उपचार में सहयोग करने वाले स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों तथा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही आयुष्मान योजना के माध्यम से मिली उपचार सुविधा के लिए सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस सहायता ने उनके परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की बड़ी राहत दी है।
बस्तर में दूध, खेतों तक पानी, युवाओं को काम और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी
नईदिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नई तस्वीर देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा की मार झेलने वाला बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा।
उन्होंने बताया कि बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है।
नारायणपुर का मॉडल बना मिसाल, किसानों के खेतों में फलदार क्रांति
रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों की आय बढ़ाने और हरित विकास को बढ़ावा देने की एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। यहां किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार वृक्षों में लगभग 99 प्रतिशत पौधे जीवित एवं स्वस्थ पाए गए हैं, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार किए गए और वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित किसानों के खेतों में उनका रोपण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का विस्तार करना है।
योजना के तहत केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वर्ष तक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। साथ ही उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) का लाभ दिया गया, जिससे पौधों को नुकसान से बचाया जा सका। किसानों ने भी सिंचाई और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाई।
हाल ही में किए गए क्षेत्रीय निरीक्षण में लगाए गए पौधों की 99 प्रतिशत जीवितता दर दर्ज की गई, जो किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम माना जा रहा है। इस पहल से आने वाले वर्षों में किसानों को आम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। ग्राम बासीन का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। “रोजगार के साथ हरियाली और आय वृद्धि” की अवधारणा को साकार करती यह पहल ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।
स्वच्छता जन-आंदोलन बने, तभी साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : सावित्री ठाकुर
रायपुर। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा है कि स्वच्छता केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है। स्वच्छ, स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वच्छता जन-आंदोलन का स्वरूप नहीं लेती, तब तक विकसित भारत का लक्ष्य पूर्ण रूप से साकार नहीं हो सकता।
केंद्रीय राज्य मंत्री बिलासपुर के पुराना बाजार, सकरी क्षेत्र में आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम में सहभागी हुईं। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, विधायक धरमलाल कौशिक तथा छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छता के प्रति अभूतपूर्व जन-जागरूकता का वातावरण निर्मित हुआ है। स्वच्छ भारत अभियान ने लोगों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। आज देश के गांवों, कस्बों और शहरों में स्वच्छता के प्रति बढ़ी जागरूकता उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व सार्वजनिक स्थलों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों तथा अन्य नागरिक सुविधाओं के आसपास स्वच्छता की स्थिति चिंताजनक रहती थी, लेकिन जनभागीदारी और सतत प्रयासों के कारण आज परिस्थितियों में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है। यह परिवर्तन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि देशवासियों के सहयोग और जागरूकता से संभव हुआ है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि स्वच्छता का वास्तविक उद्देश्य केवल सफाई अभियान चलाना नहीं है, बल्कि लोगों के मन में स्वच्छता के प्रति स्थायी चेतना विकसित करना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, कार्यस्थल, मोहल्ले और आसपास के सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने का संकल्प ले, तो स्वच्छ भारत का सपना शीघ्र ही साकार हो सकता है। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं और जन-जागरूकता से ही स्थायी परिवर्तन संभव है।
ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसकी प्राप्ति में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति से नहीं बनता, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन, स्वच्छता और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन से भी निर्मित होता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह राष्ट्रहित में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि स्वच्छता को किसी विशेष दिवस या अभियान तक सीमित न रखा जाए। इसे निरंतर चलने वाले जन-आंदोलन के रूप में अपनाया जाना चाहिए। मंदिरों, विद्यालयों, महापुरुषों की प्रतिमाओं, सार्वजनिक स्थलों, गलियों, मोहल्लों तथा सामुदायिक परिसरों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने में समाज के प्रत्येक वर्ग को सहयोग देना चाहिए। इससे न केवल स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सकारात्मक उदाहरण स्थापित होगा।
भिलाई इस्पात संयंत्र में ‘लेट्स बी सेफ’ सेफ्टी लीडरशिप कार्यक्रम शुरू
रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यस्थल सुरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा ‘विज़न ज़ीरो’ यानी शून्य दुर्घटना के लक्ष्य को व्यवहारिक रूप से स्थापित करने की दिशा में मंगलवार को व्यापक सेफ्टी लीडरशिप कार्यक्रम ‘लेट्स बी सेफ’ का शुभारंभ किया गया। लार्सन एंड टुब्रो एडुटेक द्वारा विकसित और संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षा के प्रति व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, व्यवहारगत जागरूकता तथा नेतृत्व-आधारित सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कार्यपालक निदेशक (सेल सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन) रामकृष्ण, लार्सन एंड टुब्रो एडुटेक के हेड (एंटरप्राइज बिजनेस) मनोज देवपुरकर तथा मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) देबदत्त सतपथी उपस्थित रहे। संयंत्र के विभिन्न विभागों से 31 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन महाप्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) पुष्पा एम्ब्रोज ने किया, जबकि समन्वयन सहायक महाप्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) अजय टल्लू द्वारा किया गया।
अपने संबोधन में कार्यपालक निदेशक रामकृष्ण ने कहा कि कार्यस्थल सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक कर्मचारी द्वारा प्रतिदिन लिया जाने वाला जिम्मेदार और सजग निर्णय है। उन्होंने कहा कि संयंत्र में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी के साथ उसका परिवार भी जुड़ा होता है, इसलिए सुरक्षा को संगठनात्मक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने ‘लेट्स बी सेफ’ कार्यक्रम को भिलाई इस्पात संयंत्र की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण कदम बताया।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से सेल के वरिष्ठ एवं मध्य-स्तरीय नेतृत्व वर्ग के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक अनुपालन-आधारित सुरक्षा दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए व्यक्तिगत स्वामित्व, सक्रिय नेतृत्व और साझा उत्तरदायित्व पर आधारित सुरक्षा संस्कृति विकसित करना है। कार्यक्रम की रूपरेखा लार्सन एंड टुब्रो एडुटेक द्वारा संयंत्र प्रबंधन एवं विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है, जिसमें जोखिम पहचान, जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवहारगत सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को पांच प्रमुख मॉड्यूल में विभाजित किया गया है। इनमें नेतृत्व एवं प्रबंधन की भूमिका, प्रबंधन प्रणालियों में सुरक्षा का एकीकरण, व्यक्तिगत सुरक्षा प्रतिबद्धता, सुरक्षा अवलोकन एवं भूमिका निर्वहन तथा ‘विज़न ज़ीरो’ की दिशा में संगठनात्मक यात्रा जैसे विषय शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षा नेतृत्व के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया तथा कार्यस्थल पर सुरक्षित व्यवहार को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश सुरक्षा के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसके तहत “आपको सुरक्षित रहना है” जैसी पारंपरिक अवधारणा से आगे बढ़ते हुए “मैं सुरक्षा का चयन करता हूं” जैसी आत्म-प्रेरित कार्य संस्कृति विकसित करने पर बल दिया गया। पहल के माध्यम से सुरक्षा को केवल नियामकीय आवश्यकता न मानकर व्यक्तिगत मूल्य और संगठनात्मक प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुशासन तिहार ललिता के लिए बना खुशी का आधार: मिला आयुष्मान कार्ड का सुरक्षा कवच
गौरेला पेंड्रा मरवाही : गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत लमना की ललिता वर्षों से वे अपने परिवार के स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को लेकर चिंतित रहती थीं। किसी भी गंभीर बीमारी या आकस्मिक स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में इलाज का खर्च उनके परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता था। इसी बीच सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम लमना में आयोजित जनसमस्या शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया। आयुष्मान कार्ड प्राप्त होने के बाद ललिता के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने बताया कि अब उनके परिवार को 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल सकेगी, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक परेशानियों का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।
ललिता ने कहा कि पहले उन्हें इलाज के बढ़ते खर्च की चिंता रहती थी, लेकिन अब आयुष्मान कार्ड मिलने से उन्हें सुरक्षा और विश्वास का एहसास हुआ है। यह कार्ड उनके परिवार के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। उन्होंने शासन की इस जनहितकारी पहल और सुशासन तिहार शिविर के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं अब सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। सुशासन तिहार के माध्यम से न केवल लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, बल्कि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी पात्रतानुसार हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है।