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‘संकट से उबरना - भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला

नईदिल्ली।  अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 आज हरियाणा के पंचकुला में मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘संकट से उबरना - भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में हरियाणा राज्य के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री श्री राव नरबीर सिंह के साथ-साथ केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और हरियाणा राज्य सरकार के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित हुए।

यह कार्यक्रम वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्रालय, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और पिंजोर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें भारत में गिद्ध संरक्षण के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को सुदृढ़ करने हेतु वरिष्ठ वन अधिकारी, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक, चिड़ियाघर विशेषज्ञ, संरक्षण कार्यकर्ता और अन्य हितधारक एक साथ आए।

सभा को संबोधित करते हुए यादव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का पर्यावरण संरक्षण दृष्टिकोण समग्र पारिस्थितिकी तंत्र-उन्मुख संरक्षण मॉडल पर आधारित है और किसी विशेष प्रजाति तक सीमित नहीं है। मंत्री जी ने कहा कि यह दृष्टिकोण विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण की पहलों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, चाहे वह विशालकाय बिल्लियां हों, सुस्त भालू, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, डॉल्फ़िन, घड़ियाल, जंगली जल भैंस या गिद्ध। गिद्धों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत, जो कि विभिन्न प्रकार के निवासी और प्रवासी गिद्धों का घर है उनके सफल संरक्षण के लिए प्रयासरत है जिनमें - श्वेत-पूंछ वाले, लंबी चोंच वाले, पतली चोंच वाले, लाल सिर वाले, मिस्र के, हिमालयी ग्रिफ़ॉन, यूरेशियन ग्रिफ़ॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्ध शामिल हैं।

यादव ने कुशल सफाईकर्मी के रूप में गिद्धों की महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका पर प्रकाश डाला और उन्हें प्रकृति की सफाई प्रणाली बताया। जानवरों के शवों को तेजी से खाकर, गिद्ध पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया जलवायु परिवर्तन, मानव-पशु संघर्ष जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है और 1990 के दशक से भारतीय गिद्धों की आबादी में तेजी से गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण उनकी खाद्य श्रृंखला में व्यवधान और गिद्धों द्वारा खाए जाने वाले जानवरों के लिए दर्द निवारक दवाओं का उपयोग है।

मंत्री जी ने गिद्ध संरक्षण के लिए नीति निर्माण में ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के समन्वित प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने गिद्ध-सुरक्षित पशु चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से गिद्ध-सुरक्षित क्षेत्र बनाने, सुरक्षित भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वन्य जीवन में प्रजातियों के संरक्षण में सहायता के लिए तकनीकी क्षमता निर्माण के निरंतर प्रयासों का आह्वान किया। मंत्री जी ने पशु चिकित्सकों, पशुपालकों, स्थानीय प्रशासनों और समुदायों से भी गिद्ध संरक्षण में सक्रिय योगदान देने और सुरक्षित शव प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देने की अपील की।

 

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