संतों का आशीर्वाद, जनसेवा का संकल्प…. वसुधैव कुटुंबकम् के पथ पर अग्रसर छत्तीसगढ़
रायपुर। भारत की सनातन परंपरा में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना रची-बसी है। यही वह सोच है जो भारत को विश्व में अद्वितीय बनाती है – जहाँ विविध आराध्य और परंपराएँ एक ही परिवार की तरह सह-अस्तित्व में रहती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के गॉस मेमोरियल ग्राउंड में आयोजित त्रिदिवसीय ‘विश्व शांति अखण्ड ब्रह्म यज्ञ’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संतों एवं भक्तों का छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर स्वागत किया और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि व कल्याण की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतवर्ष संतों, ऋषियों और तपस्वियों की तपोभूमि रहा है। प्राचीन काल से ही सनातन परंपरा पर समय-समय पर अनेक आघात हुए, लेकिन यह परंपरा कभी नहीं टूटी। सत्य सनातन आलेख महिमा धर्म विकास समिति द्वारा आयोजित यह यज्ञ, उसी परंपरा को और भी सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आलेख महिमा के संतों से उनका विशेष आत्मीय संबंध रहा है। उनका आशीर्वाद ही है जिसने उन्हें जनसेवा का सौभाग्य दिलाया। उन्होंने बताया कि जशपुर के इला गाँव, रायगढ़ के सरिया, हिमगिर आदि में संतों के आश्रम स्थापित हैं। रायपुर में भी आश्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराने का आश्वासन मुख्यमंत्री ने संतों को दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’ को दोबारा शुरू कर दिया है, जो विगत सरकार के कार्यकाल में पूरी तरह बंद हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि कल ही मैंने 780 श्रद्धालुओं को तीर्थयात्रा पर रवाना किया, जो रामेश्वरम, मदुरई और तिरुपति के दर्शन कर रहे हैं। उन्हें विदा करते समय जो आत्मसंतोष मिला, वह अवर्णनीय था। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। यहाँ के जन-जन में श्रवण कुमार जैसे संस्कार आज भी जीवित हैं। तीर्थ यात्रा करवाना केवल एक योजना नहीं, बल्कि हमारे मूल्यों और परंपराओं का सम्मान है।