छत्तीसगढ़ में ईंधन की कालाबाजारी पर सख्ती, जमाखोरों और अवैध खरीद पर होगी कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ में डीजल और पेट्रोल की बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन की काला बाजारी, अवैध भंडारण और अनधिकृत बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से विशेष जांच दल गठित कर ऐसे बल्क उपभोक्ताओं और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है, जो खुदरा उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित ईंधन आपूर्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के अवैध विचलन पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी।
तेल कंपनियों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स पर बिक्री बढ़ने का प्रमुख कारण निजी रिटेल आउटलेट्स से बिक्री का स्थानांतरण तथा बल्क उपभोक्ताओं का खुदरा बिक्री केंद्रों की ओर रुख करना है। उद्योग संगठनों से भी अपने सदस्यों को केवल अधिकृत माध्यमों से ही डीजल खरीदने की सलाह देने को कहा गया है।
इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य और देशभर में पेट्रोल, डीजल तथा रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है। कंपनियों के अनुसार वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम अपने टर्मिनल, डिपो, पाइपलाइन नेटवर्क, एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र तथा खुदरा बिक्री केंद्रों के माध्यम से निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं।
1 मई से 31 मई 2026 के दौरान छत्तीसगढ़ में डीजल (हाई स्पीड डीजल) की खुदरा बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। राज्य के आठ जिलों में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि रही। बस्तर में 32 प्रतिशत, बालोद में 28 प्रतिशत, कोरिया में 25.4 प्रतिशत, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 24.9 प्रतिशत तथा कोंडागांव में 22.1 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। राजधानी रायपुर में भी 19.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि दुर्ग और बलौदाबाजार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी सामने आई।
तेल कंपनियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में अनावश्यक खरीदारी से बचें और ईंधन उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों तथा तेल विपणन कंपनियों की आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।