छत्तीसगढ़

भिलाई इस्पात संयंत्र में ‘समन्वय-2026’ का शुभारंभ, 10.2 मिलियन टन क्षमता विस्तार परियोजना को मिलेगी गति

रायपुर। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में संयंत्र की उत्पादन क्षमता को वर्तमान 6.8 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 10.2 मिलियन टन प्रति वर्ष करने की प्रस्तावित विस्तार परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु बुधवार को दो दिवसीय विक्रेता सहयोग सम्मेलन ‘समन्वय-2026’ का शुभारंभ किया गया। भिलाई निवास में आयोजित इस सम्मेलन का विषय “भविष्य के विस्तार हेतु सहभागिता का सुदृढ़ निर्माण” रखा गया है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन एजेंसियों, सलाहकारों, उपकरण निर्माताओं, सेवा भागीदारों तथा अन्य परियोजना हितधारकों के मध्य समन्वित सहयोग को सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक प्रभारी, भिलाई इस्पात संयंत्र, चित्त रंजन महापात्र ने किया। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) एके चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) पीके सरकार, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) अरुण कुमार, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी, कार्यवाहक कार्यपालक निदेशक (खदान) आरबी गहरवार सहित सेल निगमित कार्यालय एवं संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सम्मेलन में देशभर की 100 से अधिक विक्रेता कंपनियों के 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

अपने संबोधन में चित्तरंजन महापात्र ने कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2030-31 तक देश की इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी लक्ष्य के अनुरूप सेल ने वर्ष 2030 तक अपनी उत्पादन क्षमता को 35 मिलियन टन तक विस्तारित करने की परिकल्पना की है, जिसमें भिलाई इस्पात संयंत्र की क्षमता वृद्धि एक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने कहा कि देश की तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था इस्पात की मांग को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है, जिससे इस्पात उद्योग के लिए व्यापक अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।

उन्होंने विस्तार परियोजना के सफल क्रियान्वयन में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्रणालियों तथा सुरक्षित कार्य-पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्ववर्ती विस्तार परियोजनाओं के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी हितधारकों से सामूहिक प्रयासों के माध्यम से चुनौतियों का समाधान करते हुए परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों से उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचारी कार्यान्वयन पद्धतियों, लॉजिस्टिक्स अनुकूलन तथा सहयोगात्मक समाधानों पर सार्थक विचार-विमर्श करने की भी अपील की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) पीके सरकार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ‘समन्वय-2026’ की अवधारणा, उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र की प्रस्तावित क्षमता वृद्धि केवल इंजीनियरिंग उत्कृष्टता से संभव नहीं होगी, बल्कि इसके लिए सभी हितधारकों के मध्य निर्बाध समन्वय और सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक होगी। उन्होंने विक्रेताओं और सहयोगी संस्थाओं से राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में प्रभावी योगदान देने का आह्वान किया।