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डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पेंशन संबंधी शिकायतों के समयबद्ध निवारण का आह्वान किया

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीपृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालयपरमाणु ऊर्जा विभागअंतरिक्ष विभागकार्मिकलोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज पेंशन संबंधी शिकायतों के लिए समयबद्ध निवारण तंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के व्यापक शासन मॉडल के अनुरूप बनाने का आह्वान कियाजिसमें नागरिकों को केंद्र में रखा गया है। नई दिल्ली में आयोजित 13वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत में बोलते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारत के पेंशनभोगियों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक संवेदनशीलता और दक्षता की आवश्यकता पर बल दिया।

पूरे देश से पेंशनभोगीसरकारी अधिकारी और विभाग प्रमुखों को साथ लेकर आए एक दिवसीय कार्यक्रम में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पेंशन अदालत मॉडल हाल के वर्षों में किए गए सबसे नागरिक-हितैषी सुधारों में से एक है। उन्होंने कहा, "एक पेंशनभोगीजिसने राष्ट्र के लिए जीवन भर सेवा की हैउसे अपने हक के लिए इधर-उधर भटकना नहीं चाहिए।" उन्होंने विभागों से ऐसे मामलों को सुलझाने में "समग्र सरकार" का दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निवारण केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि पूर्वानुमानितप्रौद्योगिकी द्वारा समर्थित और करुणा से प्रेरित होना चाहिए। सितंबर 2017 में अपनी शुरुआत के बाद सेदेश भर में 12 पेंशन अदालतें आयोजित की गई हैंजिनमें कुल 25,416 मामले लिए गए हैं - जिनमें से 18,157 सफलतापूर्वक हल किए गए हैं। इसका मतलब है कि समाधान दर 71 प्रतिशत से अधिक है। यह वह संख्या है, जिसे डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पहल की प्रभावशीलता के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पिछली अदालतों की कई सफल कहानियां साझा कींजिनमें जसोदा देवी का मामला भी शामिल हैजिन्हें 36 साल बाद उनका उचित हक मिलाऔर अनीता कनिक रानी​​जिन्हें उनके मामले की सुनवाई के दिन ही 20 लाख रुपये का बकाया पारिवारिक पेंशन दिया गया। उन्होंने कहा कि इनमें से कई कहानियां अब पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) की उपलब्धियों में दर्ज हैं। 13वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने 12वीं पेंशन अदालत की सफलता की कहानियों का संकलन भी जारी कियाजिसका शीर्षक है "बहादुर सैनिक और वीर नारियां"। पुस्तिका में काफी समय से लंबित पेंशन संबंधी शिकायतों के प्रेरक विवरण दिए गए हैंजिन्हें अदालत की प्रणाली द्वारा सुलझाया गयाजिसमें रक्षा पेंशनभोगियों और सशस्त्र बलों के कर्मियों के परिवारों पर विशेष ध्यान दिया गया। ये वास्तविक जीवन की कहानियां सरकार की अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियोंविशेष रूप से महिलाओं और वीर नारियों की सेवा और बलिदान का सम्मान करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण हैंताकि उनके सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन में समय पर न्याय और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके। 

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