श्रोताओं ने महसूस किया ‘...फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’
2026-08-14 06:58 PM
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0- महाराष्ट्र मंडल की कोराओके समिति ने सियान गुड़ी में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सुमधुर कार्यक्रम ‘एक शाम देश के नाम’ किया आयोजित
रायपुर। सुरेश पालकर की ‘मेरा जूता है जापानी...’ की बेहतरीन प्रस्तुति से सियान गुड़ी- दिव्यांग बालिका विकास गृह में आयोजित कार्यक्रम में बैठा हर श्रोता महसूस करने लगा कि आखिरकार उसका दिल भी हिंदुस्तानी ही है। बात हो रही है कि 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशभक्ति के गानों के सुमधुर कार्यक्रम ‘एक शाम देश के नाम’ की, जिसका आयोजन महाराष्ट्र मंडल की कोरोआके समिति ने किया।
डॉ. कमल वर्मा ने ‘मैं रहूं या न रहूं देश रहना चाहिए’ की प्रभावी प्रस्तुति दी। गौतम घाटगे ने ‘हम तो है परदेश में…’ अरविंद वाघ ने ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’, उपाध्यक्ष गीता दलाल ने ‘ए मेरे प्यारे वतन’, रंजना कठोटे और वंदना अलोणी ने ‘ए मालिक तेरे बंदे हम’ गाकर कार्यक्रम को श्रोताओं की तालियों के साथ आगे बढ़ाया।
किशोर मराठे ने ‘जहां डाल- डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा’, हेमंत मार्डीकर ने ‘कर चले हम फिदा जानो तन साथियों’, जयश्री गोल्हानी ने ‘हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के’, विवेक केलकर ने ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बातें पुरानी', कामिनी पतंगीवार ने ‘तन मेरा मन मेरे देश के लिए’ भावेश कुमार कोठारी ने ‘दुल्हन चली, हो बहन चली’ की प्रस्तुतियों से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
सरस्वती वंदना से शुरू हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी विनोद शेष ने सबसे पहले महाराष्ट्र मंडल के कलाकारों के लिए म्यूजिक सिस्टम का उपहार दिया। उन्होंने म्यूजिक सिस्टम का शुभारंभ देशभक्ति से संबंधित गीत की दो लाइनें गुनगुनाकर भी किया। इस अवसर पर विनोद शेष ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश को आजादी कैसे मिली, इसकी जानकारी हर किसी को होना चाहिए। हमारे जेन-जी अधिकारों की बातें तो करते हैं, जंतर मंतर में प्रदर्शन करते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, उन्हें जापान का इतिहास पढ़ना चाहिए। द्वितीय विश्व युद्ध में तबाह हो चुका जापान आज तकनीकी क्षेत्र में दुनिया का सबसे अग्रणी व विकसित देश है, तो इसलिए कि वहां के लोग सिर्फ देश के लिए काम करते हैं, सोचते हैं। वहां हड़तालें नहीं होती क्योंकि हर एक नागरिक को पता है कि एक दिन भी काम बंद करने से हमारा देश पिछड़ जाएगा। यही भावना हमारे युवाओं में जागृत करने की जरूरत है, तभी हम सही मायनों में आजाद होंगे। हम अपने अधिकारों की बातें करने से पहले जिम्मेदारियों की बातें करें, तो बेहतर होगा। इस मौके पर शेष ने दो पंक्तियां गुनगुना कर तालियां भी बटोरीं।
काफी देर तक चले कार्यक्रम का संचालन सुमीत मोड़क ने किया। प्रस्तावना अजय पोतदार ने, तो आभार प्रदर्शन भारती पलसोदकर ने व्यक्त किया। सचिव चेतन दंडवते, दिव्यांग बालिका विकास गृह प्रभारी मालती मिश्रा, सियान गुड़ी प्रभारी प्रवीण क्षीरसागर, प्रशांत बक्षी, भालचंद्र पलसोदकर, अभय भागवतकर, वैभव बर्वे, अरुण काठोटे, अंकिता किरवई सहित बड़ी संख्या में मंडल के पदाधिकारियों, सभासदों के साथ संगीत प्रेमी श्रोताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।