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लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में बड़ा एक्शन, KDA ने किया 5 प्रतिष्ठान सील

लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने भी अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और नियमों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। देर रात तक चले इस विशेष अभियान के दौरान केडीए ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए पांच प्रतिष्ठानों को सील कर दिया, जबकि कुल 22 संस्थानों को जांच के दायरे में लिया गया है।

केडीए अधिकारियों के अनुसार कानपुर शहर के चारों जोनों में ऐसे प्रतिष्ठानों की पहचान की गई थी, जहां भवन निर्माण मानकों, अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था और अन्य वैधानिक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। जांच के दौरान कई स्थानों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद पांच प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, सोमवार 22 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक निजी कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे। घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। हादसे के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

पुलिस ने इस मामले में भवन स्वामी सहित चार नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105, 110, 125 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां आग लगने के कारणों, भवन की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि घटना की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाएगी तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। घटनास्थल पर मौजूद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि हादसे में 14 बच्चों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घायल बच्चों का इलाज किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
 

केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने बताया कि अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सक टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं मृतकों के शवों का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लखनऊ अग्निकांड के बाद पूरे प्रदेश में कोचिंग सेंटरों, स्कूलों, अस्पतालों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू हो गई है। प्रशासन का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। कानपुर में केडीए की कार्रवाई को इसी व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर लगातार कार्रवाई की जाएगी। 

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