श्रीकृष्ण के जहां-जहां चरण पड़े, उन्हें श्रीकृष्ण तीर्थ के रूप में विकसित कर रही सरकार : मुख्यमंत्री
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कभी आसान नहीं रहा, जिन्हें जन्म लेते ही मार डालने का प्रयास किया गया हो, ऐसे शिशु का कान्हा से विश्व को श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञान देने वाले श्रीकृष्ण वंदे जगतगुरु की उपाधि पाने तक का जीवन बेहद संघर्षमय और कठिन परिस्थितियों में बीता। निराशा की घनघोर परछाइयों के बावजूद उन्होंने चुनौतियों से कभी मुंह नहीं मोड़ा और अपने जीवन लोक कल्याण के लिये का सदुपयोग किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कभी मोह नही रखा। जीवन में जिस व्यक्ति विशेष और वस्तु से उनका सामना हुआ, एक बार वहां से लौटने के बाद दोबारा वे किसी से नहीं मिले। सर्वविदित है कि विश्व के कल्याण के लिए गीता का ज्ञान भी योगीराज भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से ही निकला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण 64 कलाओं, 14 विद्या और 18 पुराणों में निष्णात थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की शाम रविन्द्र भवन में आयोजित भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित रासलीला समारोह में उपस्थित दर्शकों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां राधा-कृष्ण की सजीव झांकी में राधा-कृष्ण बने सुधि और सुघढ़ कलाकारों की विशेष आरती उतारी और उनसे आशीष पाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रासलीला समारोह में दूरदराज से आए कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा सभी को हलषष्ठी और जन्माष्टमी की अग्रिम बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश से गहरा नाता रहा। वे मध्यप्रदेश आकर यहीं शिक्षित-दीक्षित होकर कान्हा से भगवान श्रीकृष्ण बने। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, राज्य सरकार उन स्थलों को चिन्हित कर उन्हें श्रीकृष्ण तीर्थ के रूप में विकसित कर रही हैं।
संस्कृति विभाग द्वारा रविन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच में सात दिवसीय 'रासलीला समारोह' का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया जा रहा है। समारोह में प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की मनोहारी लीलाओं को सौंदर्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में दर्शक इन लीलाओं को देखने एवं देश के सुविख्यात भजन गायकों के भक्ति गायन को सुनने पहुंच रहे हैं।