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नर्मदा में बड़ा हादसा इंजन फेल होने से 15 जवानों से भरी मोटरबोट डूबी

जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी के ग्वारीघाट पर शुक्रवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और नदी में निगरानी के लिए पेट्रोलिंग कर रही होमगार्ड की मोटरबोट का बीच धार में अचानक इंजन बंद हो गया। नदी में तेज बहाव के कारण बोट अनियंत्रित होकर बहने लगी और उसमें पानी भर गया। कुछ ही देर में मोटरबोट डूब गई। घटना के समय बोट में होमगार्ड के जवानों और आपदा प्रबंधन से जुड़े सदस्यों समेत करीब 15 लोग सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी और स्थानीय नाविकों की तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।


घटना ग्वारीघाट इलाके में उस समय हुई जब नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था। बरगी बांध के गेट खोले जाने के कारण नदी में पानी का बहाव काफी तेज था। ऐसी स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए होमगार्ड और आपदा प्रबंधन से जुड़े जवानों को तैनात किया गया था। टीम मोटरबोट के जरिए नदी में पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान बोट का इंजन अचानक बंद हो गया। इंजन बंद होते ही बोट पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो गया और वह तेज धार के साथ बहने लगी।

बीच नर्मदा में बंद हुआ मोटरबोट का इंजन 
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मोटरबोट जब नदी के बीच पहुंची तभी उसका इंजन बंद हो गया। तेज बहाव के बीच इंजन को दोबारा शुरू नहीं किया जा सका। इसके बाद बोट गोते खाने लगी और धीरे-धीरे उसमें पानी भरने लगा। स्थिति बिगड़ती देख बोट में सवार लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई। कुछ ही समय में मोटरबोट पानी में डूबने लगी। नर्मदा की तेज धार के बीच करीब 15 लोगों की जान खतरे में पड़ गई। हालांकि सभी लोगों के लाइफ जैकेट पहने होने से स्थिति संभालने में काफी मदद मिली। रिपोर्टों के अनुसार घटना के समय बरगी बांध के 13 गेट खुले थे, जिसके चलते नर्मदा का बहाव काफी तेज था। इंजन बंद होने के बाद बोट को किनारे तक लाना मुश्किल हो गया था। तेज धारा बोट को लगातार आगे की तरफ बहा रही थी।

स्थानीय नाविक बने मददगार 
बोट में फंसे लोगों की आवाज सुनते ही आसपास मौजूद स्थानीय नाविक मदद के लिए आगे आए। तीन से चार नाविक अपनी नावों के साथ तेज बहाव के बीच पहुंचे और बोट में सवार लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास शुरू किया। स्थानीय नाविकों और राहत दल की तत्परता के कारण सभी लोगों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचा दिया गया। हादसे में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई। सभी सवारों के पास लाइफ जैकेट होने को भी बड़ा कारण माना जा रहा है कि घटना गंभीर त्रासदी में नहीं बदली। अगर लाइफ जैकेट नहीं होती या स्थानीय नाविकों को पहुंचने में देर होती तो तेज बहाव के कारण हालात काफी गंभीर हो सकते थे।

आठ लोगों की क्षमता वाली बोट में करीब 15 सवार 
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल मोटरबोट में सवार लोगों की संख्या को लेकर खड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक होमगार्ड कमांडेंट ने बताया कि मोटरबोट की अधिकतम क्षमता आठ व्यक्तियों की थी, लेकिन घटना के समय उसमें करीब 15 लोग सवार थे। यानी क्षमता से लगभग दोगुने लोगों को मोटरबोट में बैठाया गया था। इस मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। क्षमता से ज्यादा लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिस टीम पर नदी में श्रद्धालुओं और आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी उसकी अपनी बोट में निर्धारित क्षमता से ज्यादा लोगों का सवार होना गंभीर मामला माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बोट चालक को निलंबित कर दिया गया है। वहीं पूरे मामले की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्षमता से ज्यादा लोगों को बोट में क्यों बैठाया गया और तकनीकी खराबी की स्थिति में जरूरी सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं।

चालक को लेकर भी उठे सवाल 
कुछ मीडिया रिपोर्टों में बोट चालक के शराब के नशे में होने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक चालक का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है और रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल इसे जांच के दायरे में आया आरोप ही माना जा रहा है। प्रशासनिक जांच में मोटरबोट की तकनीकी स्थिति और इंजन में आई खराबी की वजह भी महत्वपूर्ण होगी। यह भी देखा जाएगा कि पेट्रोलिंग शुरू करने से पहले बोट की तकनीकी जांच की गई थी या नहीं और नदी के तेज बहाव को देखते हुए निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को बोट में बैठाने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया।

बरगी बांध के गेट खुलने से उफान पर नर्मदा 
बरगी बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था। ग्वारीघाट जैसे इलाकों में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही थीं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होमगार्ड की पेट्रोलिंग बोट भी नदी में उतारी गई थी। इसी दौरान यह घटना हुई। नदी में पानी का स्तर बढ़ने और तेज बहाव की स्थिति में प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। ऐसे समय में घाटों पर आने वाले लोगों को भी नदी के गहरे पानी और तेज धार से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि तेज बहाव के दौरान छोटी सी तकनीकी खराबी भी गंभीर संकट पैदा कर सकती है।

लाइफ जैकेट ने बचाई जान पूरे 
घटनाक्रम में सबसे राहत देने वाली बात यह रही कि बोट में सवार सभी लोगों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। मोटरबोट में पानी भरने और उसके डूबने के बावजूद सभी लोग सुरक्षित रहे। स्थानीय नाविकों ने भी बिना समय गंवाए मदद पहुंचाई और लोगों को सुरक्षित किनारे तक लाने में अहम भूमिका निभाई। 

घटना के बाद नदी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर पेट्रोलिंग और बचाव कार्यों में इस्तेमाल होने वाली मोटरबोट की नियमित तकनीकी जांच, निर्धारित क्षमता का पालन और पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। जबलपुर के ग्वारीघाट में हुई इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन मोटरबोट की क्षमता और सुरक्षा नियमों को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े हुए हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मोटरबोट का इंजन किस वजह से बंद हुआ और क्षमता से अधिक लोगों को उसमें बैठाने के लिए कौन जिम्मेदार था। फिलहाल राहत की सबसे बड़ी बात यही है कि नर्मदा की तेज धार में बोट डूबने के बावजूद उसमें सवार सभी लोग सुरक्षित बच गए।
 
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