31 मार्च—नक्सलवाद के अंत और नए छत्तीसगढ़ की शुरुआत की तारीख: रायपुर में बोले अमित शाह
2026-02-09 09:34 AM
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रायपुर| छत्तीसगढ़, जिसे कभी नक्सली हिंसा और माओवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब विकास और प्रगति का नया पर्याय बनता दिख रहा है। रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद यह दावा किया कि 31 मार्च से पहले नक्सलवाद का पूरी तरह अंत हो जाएगा।
रायपुर में हुई अहम सुरक्षा बैठक
रविवार, 8 फरवरी को रायपुर में आयोजित इस बैठक में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव, आईबी निदेशक और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एनआईए के महानिदेशक भी शामिल हुए। ओडिशा, महाराष्ट्र, झारखंड और तेलंगाना के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक का हिस्सा बने।
शाह का ऐलान – ‘31 मार्च से पहले नक्सलवाद समाप्त’
बैठक के बाद अमित शाह ने कहा कि सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, बुनियादी ढांचे का विकास और माओवादी वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार से सकारात्मक परिणाम मिले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि आत्मसमर्पण नीति और सख्त कार्रवाई से नक्सलवाद का अंत सुनिश्चित है और 31 मार्च से पहले इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
विकास की नई पहचान बना छत्तीसगढ़
अमित शाह ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, आज डबल इंजन सरकार में विकास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने बताया कि यहां के युवा खेल, फॉरेंसिक और तकनीकी शिक्षा में आगे बढ़ रहे हैं, साथ ही अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं। रायपुर में उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा भी की।
बस्तर – कभी सबसे मजबूत गढ़
छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र, जिसमें सात जिले शामिल हैं, लंबे समय तक माओवादियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा। यह क्षेत्र महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा से सीमा साझा करता है। हालांकि, हाल के वर्षों में नक्सल-विरोधी अभियानों की तीव्रता बढ़ने से यहां उग्रवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है।
नक्सलियों पर बड़ी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, जनवरी 2024 से अब तक छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ों में 500 से अधिक नक्सली मारे गए हैं। इनमें सीपीआई के महासचिव नंबाला केशवा राव उर्फ बसवरजू जैसे शीर्ष नेता भी शामिल हैं। इसी अवधि में लगभग 1,900 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 2,500 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया।
अमित शाह का यह दौरा और उनके बयान छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़ का संकेत देते हैं। कभी हिंसा और भय का पर्याय रहा यह राज्य अब विकास, शिक्षा और संस्कृति की नई पहचान गढ़ रहा है। यदि केंद्र सरकार की तय समयसीमा के अनुसार नक्सलवाद का अंत होता है, तो यह देश की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।