‘कुष्ठ रोग-मुक्त भारत’ के लिए रणनीतियों को सुदृढ़ बनाने कार्यशाला का आयोजन
रायपुर। ‘कुष्ठ रोग-मुक्त भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नवा रायपुर में कुष्ठ रोग के शून्य संचरण को प्राप्त करने के लिए कार्यक्रम प्रदर्शन की समीक्षा और केंद्रित रणनीतिक कार्रवाई पर दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अपर सचिव एवं मिशन निदेशक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) आराधना पटनायक ने कुष्ठ रोग के बोझ को कम करने में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और याद दिलाया कि देश ने 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में इस बीमारी का उन्मूलन हासिल कर लिया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि कई स्थानिक जिलों और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में संक्रमण अभी भी जारी है, जिसके लिए संक्रमण को पूरी तरह से रोकने के लिए गहन और लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
शीघ्र निदान और त्वरित उपचार के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने स्थानिक क्षेत्रों में समय-समय पर कुष्ठ रोग मामलों की पहचान अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संपर्क ट्रेसिंग को मजबूत करने और विशेष रूप से संवेदनशील और दुर्गम आबादी में संक्रमित मामलों के पात्र स्वस्थ संपर्कों के बीच एकल खुराक रिफैम्पिसिन (एसडीआर) के माध्यम से पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) के कवरेज का विस्तार करने का भी आह्वान किया। राज्यों को संपर्क स्क्रीनिंग और पीईपी कवरेज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि ये उपाय रोग संचरण को कम करने और नए संक्रमणों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पटनायक ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि पर्याप्त प्रगति हासिल की गई है, अब चुनौती शेष स्थानिक क्षेत्रों में प्रगति को बनाए रखने और कार्रवाई में तेजी लाने में है। जवाबदेही, समयबद्ध निर्णय लेने और प्रभावी कार्यक्रम क्रियान्वयन पर बल देते हुए उन्होंने राज्यों से नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करने, क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान करने और सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया। उन्होंने कार्यक्रम क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ढांचे के तहत क्षमता निर्माण, सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों और समन्वय के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कुष्ठ रोग की बेहतर जांच और शीघ्र निदान के लिए सामुदायिक आधारित मूल्यांकन चेकलिस्ट (सीबीएसी), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग करने की वकालत की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत उपलब्ध फ्लेक्सी-पूल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए राज्य और जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों को मार्गदर्शन भी दिया और सभी भागीदार राज्यों से शून्य संचरण के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में गति बनाए रखने का आह्वान किया।
महामारी विज्ञान संबंधी परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए सुश्री पटनायक ने प्रतिभागियों को सूचित किया कि पांच उच्च प्राथमिकता वाले राज्य - महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश - मिलकर भारत में कुष्ठ रोग के लगभग 50 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि इन राज्यों में प्रति 10,000 जनसंख्या पर एक से अधिक मामले दर्ज करने वाले जिलों की संख्या भी काफी अधिक है, जिनमें छत्तीसगढ़ के 23 जिले, झारखंड के 21 जिले, महाराष्ट्र और ओडिशा के 18-18 जिले और मध्य प्रदेश के 10 जिले शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जहां अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कुष्ठ रोग उन्मूलन का दर्जा हासिल कर लिया है, वहीं छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ अभी भी उप-राष्ट्रीय स्तर पर उन्मूलन लक्ष्य प्राप्त करने से पीछे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शून्य संचरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्यों के बीच मजबूत सहयोग, साक्ष्य-आधारित योजना, गहन निगरानी, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और इस बीमारी से जुड़े कलंक और भेदभाव को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक होंगे।