रायपुर

बदली नारायणपुर की सूरत : उफनते नदी-नाले अब राह के रोड़ा नहीं, विकास को मिली 'सेतु' से नई रफ़्तार

 रायपुर : कभी जिन ग्रामीण अंचलों में बरसात आते ही जिंदगी थम सी जाती थी, आज वहां विकास की नई बयार बह रही है। नारायणपुर जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण उपसंभाग) द्वारा बनाए गए उच्चस्तरीय पुलों और पक्की सड़कों ने वनांचल के जनजीवन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। इस बुनियादी सुधार से जिले के लगभग 65 गांवों का संपर्क अब साल के बारह महीने मुख्य मार्गों से जुड़ा रहेगा, जिससे हजारों ग्रामीणों को सुगम और सुरक्षित आवागमन की सौगात मिली है।

     नारायणपुर जिले के लगभग 65 अंदरूनी गांव इससे लाभान्वित होंगे। बारहमासी सुरक्षित आवागमन और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी।

      कुछ समय पहले तक, मानसून आते ही नारायणपुर के कई अंदरूनी गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय और अन्य मुख्य शहरों से पूरी तरह कट जाता था। उफनती नदियां और नाले ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थे। स्कूल-कॉलेज जाने वाले नौनिहाल हों, अपनी उपज बेचने की आस में बैठे किसान हों, या फिर अस्पताल पहुंचने की जद्दोजहद करते गंभीर मरीज हर किसी को बाढ़ का पानी उतरने के लिए घंटों, कभी-कभी तो दिनों का इंतजार करना पड़ता था। टापू में तब्दील हो चुके इन गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए भी एक कठिन परीक्षा होती थी।

      लोक निर्माण विभाग द्वारा समयबद्धता और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए गए इन पुल-सड़क निर्माण कार्यों ने क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। अब एम्बुलेंस बिना किसी बाधा के सुदूर गांवों तक समय पर पहुंच रही है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को ऐन वक्त पर जिला अस्पताल पहुंचाना अब बेहद आसान हो गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ी है। नदी-नालों पर सुरक्षित ऊंचे पुल बनने से अब विद्यार्थियों को स्कूल या कॉलेज जाने के लिए अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ती। बारिश के दिनों में भी बच्चों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी है। खेती-किसानी और व्यापार को नए पंख मिले। सड़कों और पुलों के इस जाल से परिवहन की लागत में भारी कमी आई है। स्थानीय किसान अब अपनी उपज सही समय पर बड़ी मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं। वहीं छोटे व्यापारियों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए सामान लाना-ले जाना किफायती होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।