एम्स रायपुर में 59 वर्षीय व्यक्ति का अंगदान; छत्तीसगढ़ के सबसे अधिक आयु के मृतक अंगदाता बने अश्विन कुमार राठौर
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर ने मृतक अंगदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 59 वर्षीय व्यक्ति के सफल अंगदान एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की है। इस मानवीय पहल से एक मरीज को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है, जबकि दो अन्य मरीजों की दृष्टि बहाल करने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि रायपुर निवासी अश्विन कुमार राठौर छत्तीसगढ़ के सबसे अधिक आयु के मृतक अंगदाता बन गए हैं।
देवेंद्र नगर निवासी अश्विन कुमार राठौर को गंभीर स्वास्थ्य समस्या के बाद एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था। ट्रॉमा, गहन चिकित्सा इकाई (इंटेंसिव केयर यूनिट-आईसीयू) तथा न्यूरोसर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम द्वारा सभी आवश्यक उपचार किए गए, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद निर्धारित कानूनी एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं का पालन करने के उपरांत उन्हें ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत्यु) घोषित किया गया।
इस कठिन समय में एम्स रायपुर के ट्रांसप्लांट समन्वयक विषोक एन. अम्बे पटेल एवं विनीता पटेल ने परिजनों को मृतक अंगदान के महत्व से अवगत कराया। गहरे शोक के बीच परिवार ने दोनों किडनी तथा दोनों कॉर्निया (नेत्र) दान करने का प्रेरणादायी निर्णय लिया। परिजनों ने बताया कि अश्विन कुमार राठौर ने कुछ वर्ष पहले ही परिवार के समक्ष अपनी मृत्यु के बाद अंगदान करने की इच्छा व्यक्त की थी।
अंग निकासी (ऑर्गन रिट्रीवल) के बाद चिकित्सकीय परीक्षण में एक किडनी प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं पाई गई, जबकि दूसरी किडनी का सफल प्रत्यारोपण दुर्ग निवासी 70 वर्षीय मरीज में किया गया, जो पिछले पांच वर्षों से डायलिसिस पर थे। प्रत्यारोपण के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उन्हें एम्स रायपुर के ट्रांसप्लांट आईसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। वहीं, दान किए गए दोनों कॉर्निया सुरक्षित संरक्षित कर लिए गए हैं, जिनका उपयोग राज्य की प्रतीक्षा सूची में शामिल पात्र मरीजों की दृष्टि बहाल करने के लिए किया जाएगा।
यह एम्स रायपुर में अब तक का नौवां मृतक अंगदान (डीसीज्ड ऑर्गन डोनेशन) है। संस्थान में अब तक 104 किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं, जिनमें 15 प्रत्यारोपण मृतक अंगदाताओं से प्राप्त अंगों के माध्यम से संभव हुए हैं। एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने अंगदाता के परिजनों के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। उन्होंने कहा कि राठौर परिवार का यह निस्वार्थ निर्णय समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आने के लिए प्रेरित होंगे।
नेफ्रोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनय राठौर तथा यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अमित आर. शर्मा ने कहा कि अधिक आयु के मरीजों में किडनी प्रत्यारोपण चिकित्सकीय एवं शल्य चिकित्सा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन यह सफल प्रत्यारोपण इस तथ्य का प्रमाण है कि जीवन बचाने में आयु बाधा नहीं बनती।
पूरी प्रत्यारोपण प्रक्रिया को यूरोलॉजी विभाग, नेफ्रोलॉजी विभाग तथा एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस अभियान में ट्रॉमा आईसीयू, आपातकालीन चिकित्सा, न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग विभाग, नर्सिंग सेवाओं तथा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन-एसओटीटीओ), छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगठन ने राज्य की प्रतीक्षा सूची के अनुसार अंग आवंटन की पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया।