90वीं वर्षगांठ विशेषः राष्ट्र और समाज के फायदे ही देखे इसीलिए सवर्ग याद किए जाते हैं घाटे जी
- अजय मधुकर काले
मध्यम आयवर्ग का एक आम आदमी अपने सपने के घर में क्या देखता है, यही कि दो बेडरूम वाले सुंदर से घर में भरपूर रोशनी हो, हवा हो और सभी कुछ स्पेशियस और कंफर्टेबल हो। बस इसी सपने को जीवनभर साकार किया श्री टीएम घाटे ने,और आज भी अपने इसी मिशन में लगे हुए हैं। यही कारण है कि आज भी रायपुर सहित मध्य भारत में घाटे जी को बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है। द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स छत्तीसगढ़ चेप्टर के 3 से 5 अक्टूबर को मरीन ड्राइव में लगाई गई प्रदर्शनी में भी हर दिन श्री टीएम घाटे के कार्यों की ही लगातार चर्चा होते रही और वास्तव में युवा पीढ़ी ने उनके कार्यों को शिक्षा के रूप में आत्मसात भी किया है।
श्री त्रयंबक मनोहर घाटे यानी श्री टीएम घाटे के बेहद संघर्षपूर्ण बचपन में उन्हें गुरुजनों का सस्नेह समर्पित साथ मिला। फलस्वरूप उन्होंने पूरे जीवन में कभी भी किसी गुरुजन से घर की डिजाईन बनाने की फीस नहीं ली अपितु उनके घर कम्प्लीट होते तक निरन्तर निरिक्षण करते रहे. पूरा समाज एक स्थान पर जुटे उसके लिए महाराष्ट्र मंडल रायपुर,भिलाई सहित अनेक संस्थाओं के भवन निर्माण किए .इसी तरह मिशनरीज के कई अस्पतालों को भी डिजाइन करते हुए उनके व्यक्तित्व में और भी निखार आ जाता था। आनंद, बाबूलाल, जयराम से लेकर भिलाई के चंद्रा- मौर्या, बसंत, उत्तम सहित मध्य भारत के 100 से अधिक टाकीजों के निर्माण में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बेहतरीन भवन पर आज भी यहां से पढ़कर निकले हजारों विद्यार्थी गर्व करते हैं।उनके कार्यों की सूची वास्तव में अंतहीन है.
आज 10 अक्टूबर को आदरणीय श्री घाटे जी की 90वीं वर्षगांठ पर महाराष्ट्र मंडल के नए भवन में उन्हें याद करते हुए हम सभी गौरवान्वित हैं, वो इसलिए भी, क्योंकि पहले भवन की ही तरह दूसरे भवन की परिकल्पना भी उन्होंने ही की थी। महाराष्ट्र मंडल का इतना खूबसूरत और सर्वसुविधायुक्त सामाजिक भवन शहर में शायद ही कोई हो. सामाजिक क्षेत्र के कार्यो की शुरुआत तो उनके युवावस्था से ही आरम्भ हो गई थी कि आसपास के लोगों के कार्यों के लिए सदैव उपलब्ध रहने वाले घाटे जी ने महाराष्ट्र मंडल के भवन के साथ साथ मंडल के कार्यो में दिव्यांग बालिका विकास गृह,कामकाजी महिलाएं छात्राओं के लिए वसतिगृह,निर्धन आय वर्ग के बच्चों के लिए अँग्रेजी माध्यम संत ज्ञानेश्वर विद्यालय स्थापना विचार ये सब मंडल के युवा सदस्यों के साथ रहकर 45 वर्ष पूर्व ही कर दिए जो उनकी विजन क्षमता दूर दृष्टि को परिभाषित करते है.
70 वर्ष की उम्र में उन्होंने शंकर नगर के कचरे के मैदान को महाराष्ट्र मंडल,वहां निवासियों के,नगर निगम की मदद से बाल वाचनालय संस्कार केंद्र की स्थापना कर दी और शासन को भी मेसेज दिया कि रायपुर के चारो तरफ ऐसे मैदान को सामाजिक संस्थाओं को साथ लेकर संस्कार केंद्र का निर्माण करे और सामाजिक दायित्व निभाए. हिरापूर में नेत्रहीन बालिकाओं के लिए प्रेरणा भवन उनकी सोच और विजन का एक और बेहतरीन उदाहरणं है.
वास्तव में क्या लिखे क्या छोड़े पूरा जीवन समाज को समर्पित किया है घाटे जी ने.ऐसे व्यक्तित्व के जन्म-दिन के मौके पर हम सभी श्री घाटे जी के दीर्घायु की कामना करते हैं और उनसे सामाजिक कार्यों को कैसे गति प्रदान करे *ये प्रेरणा लेते है
( लेखकः महाराष्ट्र मंडल, रायपुर के अध्यक्ष हैं। मो. 9300663493)