रायपुर

25 साल बाद छत्तीसगढ़ को मिला पहला सरकारी होम्योपैथी कॉलेज, इसी सत्र से शुरू होगी पढ़ाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के करीब 25 वर्षों बाद प्रदेश को पहला सरकारी होम्योपैथी कॉलेज मिलने जा रहा है। नवा रायपुर में शुरू होने वाले इस कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। प्रदेश में होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल के लिए होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त किया है।

डॉ. त्रिवेदी के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार के मुताबिक, प्रदेश के पहले सरकारी होम्योपैथी कॉलेज को प्रवेश की अनुमति मिल गई है। कॉलेज में बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) पाठ्यक्रम की 63 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। प्रवेश नीट (NEET) की मेरिट के आधार पर होगा, जबकि न्यूनतम 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटे के लिए निर्धारित रहेंगी।

डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लंबे समय से सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। राज्य गठन के बाद लगभग 25 वर्षों के इंतजार के पश्चात इस संस्थान की शुरुआत से प्रदेश के उन विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो होम्योपैथी चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। इससे विद्यार्थियों को प्रदेश में ही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा आयुष चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयास प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकारात्मक हैं।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा के विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, बेहतर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना जरूरी है। नवा रायपुर में सरकारी कॉलेज की शुरुआत इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में यह संस्थान होम्योपैथी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश की पहचान मजबूत करेगा।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले तीन निजी होम्योपैथी कॉलेज संचालित हुए थे। इनमें रायपुर के राजेंद्र नगर स्थित महाराणा प्रताप होम्योपैथी कॉलेज और बिलासपुर का चौकसे होम्योपैथी कॉलेज बंद हो चुके हैं। वर्तमान में रायपुर के रामकुंड स्थित रायपुर होम्योपैथी कॉलेज में 35 सीटें उपलब्ध हैं। ऐसे में सरकारी कॉलेज की शुरुआत से प्रदेश में होम्योपैथी की पढ़ाई के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल होम्योपैथी चिकित्सा जगत ही नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र के लिए भी उत्साहजनक है। उन्होंने राज्य सरकार से कॉलेज में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, बेहतर क्लिनिकल प्रशिक्षण और अनुसंधान की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपेक्षा जताई, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

अंत में डॉ. त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी होम्योपैथी कॉलेज की शुरुआत छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत है।