कोतमा हादसा: चार मंजिला अग्रवाल लॉज के मलबे में दबे मजदूर, तीन की मौत, जांच के घेरे में निर्माण कार्य
2026-04-13 12:30 PM
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अचानक ढही इमारत, मौत और चीखों का मंजर
अनूपपुर| अनूपपुर जिले के कोतमा नगर में 4 अप्रैल 2026 की शाम 5:36 बजे का समय भयावह साबित हुआ। बस स्टैण्ड के समीप स्थित चार मंजिला अग्रवाल लॉज अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इमारत के भीतर काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए। इस दर्दनाक हादसे में तीन व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती कराए गए। पूरे नगर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बचाव कार्य देर रात तक चलता रहा।
बिना अनुमति निर्माण और गहरी खुदाई पर उठे सवाल
मुख्य नगरपालिका अधिकारी कोतमा ने प्रारंभिक जानकारी में बताया कि अग्रवाल लॉज के बगल की जमीन के स्वामी रामनरेश गर्ग और राकेश कुमार द्वारा बिना अनुमति निर्माण कार्य कराया जा रहा था। उन्होंने गहरी खुदाई कराई थी, जिससे लॉज की नींव कमजोर हो गई और यह हादसा हुआ। अब सवाल यह है कि क्या नगर निकाय की अनुमति के बिना इतना बड़ा निर्माण कार्य कैसे शुरू हुआ और किसकी लापरवाही से मजदूरों की जान गई।
मजिस्ट्रीटियल जांच के लिए गठित दल
घटना की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रीटियल जांच का आदेश दिया गया है। जांच दल को स्पष्ट बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इनमें शामिल है— अग्रवाल लॉज का स्वामित्व किसके पास है, भवन निर्माण की अनुमति कब और किन शर्तों पर दी गई थी, क्या अनुमोदित नक्शे और नियमों के अनुसार निर्माण हुआ था, बगल के भू-स्वामियों ने नगर निकाय से अनुमति ली थी या नहीं, और म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 का पालन किया गया या नहीं।
जांच का सबसे अहम बिंदु यह होगा कि बिना सक्षम अनुमति के निर्माण कार्य और गहरी खुदाई के कारण हुई जनहानि के लिए जिम्मेदार कौन है। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि नगर निकाय के किस अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी थी कि वह निर्माण कार्य की निगरानी करता और नियमों का पालन सुनिश्चित कराता।
साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि तय
न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी कोतमा ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जो भी व्यक्ति लिखित साक्ष्य, दस्तावेजी प्रमाण या कथन देना चाहते हैं, वे 17 अप्रैल 2026 को प्रातः 11 बजे से सायं 5 बजे तक उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। यह प्रक्रिया न केवल दोषियों की पहचान करेगी बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए भी दिशा तय करेगी।
लापरवाही की कीमत मजदूरों की जान
कोतमा का यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि बिना अनुमति और नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण कार्य कितने घातक हो सकते हैं। तीन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं और पूरा नगर सदमे में है। अब यह देखना होगा कि जांच दल किन निष्कर्षों पर पहुंचता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
यह घटना चेतावनी है— विकास की दौड़ में नियमों की अनदेखी अंततः मानव जीवन पर भारी पड़ती है।