CBSE के नाम पर चल रहा था गोरखधंधा, मान्यता रद्द करने की सिफारिश, CM हेल्पलाइन में हुई थी शिकायत
रायपुर। खमतराई के एसएस पब्लिक स्कूल के खिलाफ CM हेल्पलाइन में हुई शिकायत की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि स्कूल CGBSE से मान्यता प्राप्त है लेकिन गेट पर ‘CBSE पैटर्न’ का बोर्ड लगाकर पालकों से वसूली की जा रही थी। साथ ही किताब-कॉपी से लेकर TC तक में मनमानी फीस वसूली जा रही थी। इस स्कूल की एक भी दो–दो शाखाएं संचालित हैं। बिल्हा BEO ने जांच के बाद DEO को स्कूल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा भेज दी है। अब अंतिम फैसला जिला शिक्षा विभाग लेगा।
शिकायतों की जांच 28 जुलाई को की गई। इसमें यह पता चला कि स्कूल में मान्यता और संबद्धता संबंधी अनिवार्य सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित नहीं की गई थी। फीस नियमन से संबंधित अभिलेख भी उपलब्ध नहीं कराए गए। यह भी पता चला कि आरटीई के नाम पर प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है, जबकि कक्षा 9 से 12 तक गेम्स फीस और अन्य मदों में भी राशि वसूली जा रही थी। जांच दल ने इसे फीस अधिनियम-2020 के प्रावधानों के विपरीत माना है। जांच रिपोर्ट यह भी पता चला कि विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अलावा निजी प्रकाशनों की महंगी किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा था।
निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर में ही कॉपी, किताब, टाई, बेल्ट और अन्य सामग्री बिक्री के लिए रखी हुई मिली। प्रधान पाठक ने भी बयान में स्वीकार किया कि यह सामग्री विद्यालय में ही उपलब्ध कराई जाती है। जांच दल ने पाया कि स्कूल में मान्यता और संबद्धता की अनिवार्य सूचना बोर्ड नहीं लगा था। फीस नियमन के अभिलेख भी उपलब्ध नहीं कराए गए। समिति के चेयरमैन संजय सिंह खुद मकान मालिक और ट्रस्ट के चेयरमैन हैं। आवासीय सह व्यावसायिक भवन पर लीज का खेल चल रहा है, जहां बच्चों के खेलने के लिए एक इंच का मैदान भी नहीं है।
जांच प्रतिवेदन में निष्कर्ष निकाला गया है कि शिकायतकर्ता रंजेश सिंह द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुक्त एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18 के तहत मान्यता की शतों का पालन नहीं होने के कारण विद्यालय की मान्यता समाप्त करने पर विचार किया जाना चाहिए। अब DEO और सक्षम प्राधिकारी अंतिम निर्णय लेंगे। दरअसल एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने बिलासपुर स्थित एसएस पब्लिक स्कूल की खमतराई और बैमा-नगोई शाखाओं पर शिक्षा विभाग के नियमों के उल्लंघन और अवैध शुल्क वसूली की लिखित शिकायत पूर्व में भी की थी और प्रदर्शन भी किया था। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
एनएसयूआई ने बताया कि इस मामले में पहले भी शिकायत की गई थी, जिसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने जांच समिति का गठन किया था। संगठन ने आरोप लगाया था कि समिति ने अब तक न तो प्रभावी जांच की और न ही कोई ठोस कार्रवाई की। ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यालय 12 माह की नियमित फीस के अलावा प्रत्येक वर्ष “टर्म फीस” के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूल रहा है। एनएसयूआई का कहना है कि यह शिक्षा विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन है।