'आता थांबवायचं कसं?' में दिखा अन्याय का विरोध और पारिवारिक एकजुटता
0 महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव में हुआ मुंबई के प्रसिद्ध मराठी नाटक का मंचन
0 पहले अंक में खुशनुमा माहौल और दूसरे अंक में दिखी जीवन की कड़वी सच्चाई
रायपुर। आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध, ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में सोमवार 21 सितंबर को मंचित मुंबईके प्रसिद्ध मराठी नाटक में 'तन्वी' की कहानी केवल एक पात्र की नहीं, बल्कि वर्तमान में लड़कियों और परिवारों की पीड़ा को दर्शाती नजर आई। एआई के इस जमाने में बढ़ रहे साइबर क्राइम के घातक परिणामों को यह नाटक समाज के सामने उजागर करता है। तन्वी की इस पीड़ा में परिवार और समाज के लोग साथ खड़े नजर आए. जो हमें इस बात के लिए प्रेरित करते दिखे कि हमें भी समाज में ऐसा ही उदाहरण स्थापित करना होगा। मराठी सिने स्टार डॉ. गिरीश ओक, सुकन्या कुलकर्णी मोने, जान्हवी पणशीकर, आकाश पाटील, ऐश्वर्या शेटे ने अपने अभिनय और संवादों से दर्शकों को आत्म मंथन के लिए विवश कर दिया कि आखिर समाज किस दिशा में जा रहा है, और ऐसी कठिन परिस्थिति में हमारा क्या दायित्व होना चाहिए?

मराठी नाटकों, धारावाहिक, टीवी सीरियल्स और फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता डॉ. गिरीश ओक और सुकन्या मोने ने नाटक में तन्वी के माता-पिता का किरदार निभाया। दोनों ने अपने पात्रों के साथ न्याय करते हुए मध्यमवर्गीय परिवार की मानसिकता को तोड़ते हुए, दोषारोपण या डर के बजाय 'बेटी के अस्तित्व और उसके भविष्य' को प्राथमिकता दी। यह नाटक साइबर उत्पीड़ित और उनके परिवारों को आत्मसम्मान के साथ खड़े होने के लिए 'पारिवारिक ढाल' और 'सामाजिक आत्मबल' प्रदान करता नजर आया।

रंग निर्देशक आचार्य रंजन मोड़क ने बताया कि कोई भी नाटक कभी भी किसी समस्या का सीधा समाधान नहीं दे सकता, लेकिन वह दृष्टिकोण बदलने और जागरूकता फैलाने का काम निश्चित रूप से करता है। इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने साइबर अपराध के दुष्परिणाम दिखाते हुए ऐसे कठिन समय में परिवार को एकजुट होने की सीख दीं।

मराठी नाटक ‘आता थांबवायचं कसं’ का लेखन और दिग्दर्शन संदीप दंडवते ने किया। नाटक के निर्माता समृद्धी तांबे, गंधाली कुलकर्णी, सुनंदा काळुसकर, प्रवीण भोसले और भरत नारायणदास ठक्कर है। नेपथ्य में संदेश बेंद्रे, पार्श्वसंगीत की कमान समीर म्हात्रे, प्रकाश योजना रत्नकांत जगताप, रंगभूषा राजेश परब, वेशभूषा अमृता काकतकर, गीतकार विघ्नेश जोशी ने संभाली। नाटक में सूत्रधार की भूमिका में दीपक गोडबोले नजर आए।