दिव्य महाराष्ट्र मंडल

‘मिहिका, प्रीति और दुर्गा ने जिया अहिल्या का किरदार’

- अहिल्या के ओजस्वी संवादों ने दर्शकों में भरा जोश
- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभा गृह में हुआ हिंदी नाटक ‘गगन की ओर निशाना’ का मंचन
 
 
रायपर।  "यह राजपाट, यह धन-दौलत और यह वैभव मेरा नहीं है। मैं तो केवल ईश्वर की प्रतिनिधि हूँ और यह साम्राज्य प्रजा की धरोहर है। इस सिंहासन पर बैठकर यदि मैंने अपनी प्रजा के आंसुओं को नहीं पोंछा, तो मैं ईश्वर के सामने क्या मुंह दिखाऊँगी? राजा का पहला और अंतिम धर्म केवल प्रजा की सेवा और सुरक्षा है।" इन ओजस्वी संवादों ने दर्शको तो तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। मौका था महाराष्ट्र मंडल में आयोजित शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में आयोजित हिंदी नाटक ‘गगन की ओर निशाना’ के मंचन का। 
 
 
गगन की ओर निशाना नाटक की प्रस्तुति भोपाल के भूमिका नाट्य समूह द्वारा दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर के तत्वावधान में किया गया। जिसके लेखक एवं निर्देशन गोपाल दुबे है। गोपाल दुबे ने बताया कि अहिल्या बाई होल्कर का जीवन हमारे लिए प्रेरणास्पद है। अहिल्याबाई होल्कर की कहानी को वर्तमान परिदृश्य से जोड़कर मंचित किया गया। जिसमें दो युवा मध्य प्रदेश के महेश्वर शहर में स्थित अहिल्या बाई होल्कर के किले के सामने बैठक संवाद करते दिखाए गए। तभी एक बुजुर्ग उन्हें अहिल्या बाई होल्कर की कहानी बताता है। 
 
 
मंचन में छोटी अहिल्या का किरदार मिहिका शाह, बड़ी अहिल्या के रुप में प्रीति झा, और युवा अहिल्या का किरदार दुर्गा ने निभाया। तीनों ही कलाकारों ने अपने अपने संवादों से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। जहां छोटी अहिल्या की आवाज में बालपन छलक रहा था, वहीं युवा अहिल्या के रुप में दुर्गा ने दर्शकों में जोश भरने का काम किया। 
 
 
मंच पर संदीप शर्मा, रूपेश तिवारी, आशीर्वाद झा, मिहिका शाह, प्रीति झा तिवारी, यशिल दुबे, रंजीत ठाकुर, शिव रघुवंशी, संगीता ठाकुर, अकुल खरे, दुर्गा सिंह, आशीर्वाद झा, भूमिका शर्मा, उद्देश्य अगरैया, लोकेंद्र प्रतापसिंह, कार्तिक वानखेड़े, संदीप शर्मा, रूपेश तिवारी, गोपाल दुबे, गुंजन श्रीवास्तव, विदुषी, लोकेंद्र, जितेंद्र परमार, निश्चय दुबे.कार्तिक वानखेड़े नजर आए। वहीं परदे के पीछे मंच व्यस्थापक आशीर्वाद झा, मंच परिकल्पना जितेंद्र परमार, वेशभूषा ..भूमिका दुबे, प्रकाश परिकल्पक.. तानाजी, पोस्टर भूमिका दुबे, संगीत संदीप शर्मा और तालवृंद..सुरेंद्र वानखेड़े ने सहभागिता निभाई।