बेटे को बाइक देना पड़ा महंगा, पिता को भी तीन महीने की सजा
2026-11-02 08:30 AM
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दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सड़क हादसे में एक युवक की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में सत्र न्यायालय ने बाइक चालक और उसके पिता को दोषी ठहराया है। अदालत ने मोहित कुमार बघेल को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले बेटे को मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति देने पर उसके पिता मोहन लाल बघेल को तीन महीने का साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। फैसला 31 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया।
यह मामला केवल बिना लाइसेंस वाहन चलाने तक सीमित नहीं था। मोहित की बाइक की टक्कर से एक्टिवा सवार शादान अली की जान चली गई थी, जबकि पीछे बैठे उत्तम पांडेय गंभीर रूप से घायल हुए थे। अभियोजन के अनुसार, बाइक तेज और लापरवाहीपूर्वक चलाई जा रही थी। जांच में चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं होने और पिता द्वारा उसे वाहन उपलब्ध कराने की बात सामने आई। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। हादसा 4 अगस्त 2025 की रात करीब साढ़े आठ बजे हुआ था। सुपेला थाना क्षेत्र की स्मृतिनगर चौकी के अंतर्गत कोहका स्थित इंदु आईटी स्कूल के पास मोहित कुमार बघेल मोटरसाइकिल चला रहा था। इसी दौरान उसकी मोटरसाइकिल की एक्टिवा से टक्कर हो गई। दुर्घटना में एक्टिवा चालक शादान अली की मौत हो गई और उत्तम पांडेय को गंभीर चोटें आईं। घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद स्मृतिनगर चौकी पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
पुलिस की जांच में वाहन चलाने वाले मोहित के ड्राइविंग लाइसेंस की स्थिति भी सामने आई। अभियोजन के मुताबिक, उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। पिता मोहन लाल को इसकी जानकारी होने के बावजूद उन्होंने बेटे को मोटरसाइकिल चलाने के लिए दी थी। इस वजह से जांच का दायरा बाइक चालक की भूमिका के साथ वाहन उपलब्ध कराने वाले पिता तक पहुंचा। लोक अभियोजक द्रोण ताम्रकार के हवाले से पीटीआई ने बताया कि पिता-पुत्र जमुल के रहने वाले हैं। जांच पूरी होने के बाद प्रकरण अदालत में पहुंचा। सत्र प्रकरण क्रमांक 55/2026 में सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से मौखिक, चिकित्सकीय और तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। उपलब्ध न्यायालयीन कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने इन साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मोहित के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता और मोटरयान अधिनियम की संबंधित धाराओं के आरोप प्रमाणित पाए। मोहन लाल बघेल के विरुद्ध बिना वैध लाइसेंस वाले व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर मोटरसाइकिल चलाने के लिए देने का आरोप भी प्रमाणित पाया गया।
अदालत ने मोहित कुमार बघेल को भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के अंतर्गत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इसके अतिरिक्त धारा 110 के अंतर्गत तीन वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। इस प्रकार चालक के खिलाफ दुर्घटना में हुई मौत और दूसरे व्यक्ति को पहुंचे गंभीर नुकसान से जुड़े आरोपों पर फैसला सुनाया गया। पांच साल की सजा को महज ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने का दंड बताना मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं करता।
मोहित को मोटरयान अधिनियम के तहत भी अलग-अलग सजाएं सुनाई गई हैं। धारा 184 के अंतर्गत दस महीने का साधारण कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। वहीं, बिना लाइसेंस वाहन चलाने से संबंधित धारा 3/181 के तहत तीन महीने का साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना निर्धारित किया गया। अलग-अलग धाराओं में लगाए गए अर्थदंड की कुल राशि दस हजार रुपये है। पीटीआई की रिपोर्ट में भी चालक पर कुल दस हजार रुपये जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी गई है।
पिता मोहन लाल बघेल को मोटरयान अधिनियम की धारा 5/180 के तहत दोषी ठहराया गया। उन्हें तीन महीने के साधारण कारावास के साथ पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा मिली है। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर सात दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। पिता की दोषसिद्धि वाहन चलाने के कारण नहीं हुई है। उनकी जिम्मेदारी बिना वैध लाइसेंस वाले बेटे को मोटरसाइकिल उपलब्ध कराने के आधार पर तय की गई है। इस मामले में चालक और वाहन देने वाले व्यक्ति की भूमिकाओं पर अलग-अलग फैसला हुआ है।
फैसले के बाद दुर्ग पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे नाबालिग या बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले बच्चों को वाहन चलाने के लिए न दें। इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की जान गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। अदालत के निर्णय में वाहन चलाने वाले की जिम्मेदारी के साथ उसे वाहन सौंपने वाले की जवाबदेही भी तय हुई है। मामला अभिभावकों के लिए यह ध्यान रखने का संदेश देता है कि वाहन देने से पहले चालक की वैध पात्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है।