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वाराणसी पुलिस आयुक्त का सख्त वार: 25 उप निरीक्षक पर गिरी गाज

वाराणसी| जनता की शिकायतों पर लापरवाही अब नहीं चलेगी। वाराणसी पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने जनसुनवाई समाधान प्रणाली (आईजीआरएस) की समीक्षा बैठक में जो कदम उठाए, वह पुलिस प्रशासन की गंभीरता और जवाबदेही का स्पष्ट संकेत है। अक्टूबर माह की रैंकिंग में सामने आए तथ्यों ने यह उजागर किया कि कई उप निरीक्षकों ने शिकायतकर्ताओं से संवाद किए बिना ही रिपोर्ट अपलोड कर दी। परिणामस्वरूप शिकायतकर्ताओं की ओर से नकारात्मक फीडबैक दर्ज हुआ और जनपद की आईजीआरएस रैंकिंग प्रभावित हुई।

कर्तव्यहीनता पर विभागीय कार्रवाई
पुलिस आयुक्त ने इस आचरण को न केवल आपत्तिजनक बल्कि कर्तव्यहीनता की श्रेणी में रखा। ऐसे 25 उप निरीक्षकों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम यह दर्शाता है कि पुलिस प्रशासन शिकायतों के निस्तारण को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।

पारदर्शिता और तत्परता की अनिवार्यता
मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और तत्परता ही जनता का विश्वास बनाए रख सकती है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतकर्ता से संवाद करना और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना ही पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

संदेश पूरे विभाग के लिए
इस समीक्षा से विभाग को यह सख्त संदेश मिला है कि लापरवाही से पुलिस की छवि खराब होती है और इसे सुधारने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। पुलिस आयुक्त ने यह भी दोहराया कि विभाग अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग है और जनहित में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वाराणसी पुलिस आयुक्त की यह कार्रवाई केवल 25 उप निरीक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विभाग के लिए चेतावनी है। यह कदम जनता को यह भरोसा दिलाने का प्रयास है कि उनकी शिकायतें अनसुनी नहीं होंगी और पुलिस प्रशासन जवाबदेही के साथ कार्य करेगा। 

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