दो युवाओं ने पेश की समाजसेवा की मिसाल... फटे-पुराने जूतों से खड़ा किया करोड़ों का व्यापार
डेस्क। हर साल दुनिया में 35,000 करोड़ जूते कचरे में फेंक दिए जाते हैं। वहीं, 1.25 करोड़ लोगों को जूतों की जरूरत है, लेकिन वे खरीद नहीं सकते। इन्हीं लोगों की जरूरत को पूरा करने दो युवाओं ने समाजसेवा की अद्भुत मिसाल पेश की। दोनों ने मिलकर Green Sole Foundation की स्थापना की। उद्देश्य था नंगे पांव घूम रहे लोगों के पैरों में जूते पहनाना। मुंबई में दो अनजान एक-दूसरे से मिले, दोनों में दोस्ती हुई और फिर दोनों ने मिलकर एक ऐसा कारोबार खड़ा किया जो न सिर्फ जरूरतमंदों को राहत दे रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मिसाल बनकर उभरा है।
रमेश धामी (29 वर्ष) और श्रीयांश भंडारी (30 वर्ष) ने मिलकर ‘Green Sole Foundation’ नाम से एक अनोखी संस्था की शुरुआत की, जहां पुराने, बेकार और टूटी-फूटी चप्पलों और जूतों को रीसायकल करके दोबारा उपयोग करने लायक बनाया जाता है।
रमेश धामी उत्तराखंड से हैं और एक समय में मुंबई में एक्टर बनने का सपना लेकर आए थे। उन्हें मैराथन का शौक था, लेकिन बार-बार जूते धोखा दे जाते। एक बार उन्होंने महंगे ब्रांडेड जूते खरीदे, लेकिन वो भी जल्दी खराब हो गए। तब रमेश ने देशी जुगाड़ से खराब जूतों को खुद ठीक किया और महीनों तक चलाया।
इसी दौरान उनकी मुलाकात हुई श्रीयांश भंडारी से, जो राजस्थान के उदयपुर से BMH की पढ़ाई के लिए मुंबई आए थे। रमेश ने उन्हें अपना आइडिया बताया और फिर दोनों ने मिलकर 2016 में Green Sole Foundation की नींव रखी। Green Sole Foundation ने अब तक 8 लाख से अधिक जूते-चप्पल रिसायकल कर डिलीवर किए हैं। इनका लक्ष्य है, “हर जरूरतमंद के पांव में जूते पहुंचें और पर्यावरण पर भी भार कम हो।