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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया

 देलही : कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के साथ मिलकर आज नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी प्रमुख कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों—थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई) और नन्हा सा दिल—के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उत्सव मनाया तथा भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे तथा भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के सचिव  विक्रम देव दत्त के साथ वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, कार्यान्वयन भागीदार और लाभार्थी परिवार उपस्थित थे।

थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई)

थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया—दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों—से पीड़ित बच्चों की उपचार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शुरू की गई टीबीएसवाई देशभर में 4 अस्पतालों के प्रारंभिक नेटवर्क से बढ़कर 21 सूचीबद्ध अस्पतालों तक पहुंच गई है। सीआईएल भारत का एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) है जिसने थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों के लिए इस स्तर की स्वास्थ्य सेवा पहल शुरू की है।

इस योजना के अंतर्गत चार चरणों में कुल 130 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की सहायता राशि सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों को प्रदान की जाती है। अब तक 1,050 से अधिक बीएमटी पूरे किए जा चुके हैं और उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों में से भारी बहुमत अब सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी रहा है। इस योजना का कार्यान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निगरानी मार्गदर्शन में थैलेसीमिक्स इंडिया के समन्वय से किया जा रहा है।

नन्हा सा दिल

जन्मजात हृदय दोष (सीएचडी) की समस्या से निपटने के लिए नन्हा सा दिल पहल शुरू की गई है। भारत में प्रतिवर्ष अनुमानित 2.4 लाख नवजात बच्चे जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित होते हैं, जिनमें से केवल लगभग 5 प्रतिशत को समय पर उपचार मिल पाता है।

सीआईएल द्वारा मार्च 2024 में झारखंड के चार जिलों से श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ साझेदारी में शुरू की गई इस पहल का विस्तार बाद में सीआईएल की सहायक कंपनियों—एसईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और डब्ल्यूसीएल—के माध्यम से किया गया। आधुनिक नैदानिक उपकरणों का उपयोग कर 2 लाख से अधिक बच्चों की जांच की जा चुकी है और 1,500 से अधिक सुधारात्मक सर्जरी की गई हैं। मरीजों के परिवारों के लिए यह उपचार पूरी तरह निःशुल्क है, जिसमें यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी शामिल है।

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