दिव्य महाराष्ट्र मंडल

बच्चों को भी होती है फिजियोथेरेपी की आवश्यकताः डा. संगीता

रायपुर। विकास में देरी, जन्मजात बीमारियां, हड्डियों की चोट या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है। बच्चों में सबसे आम प्रकार की शारीरिक अक्षमता सेरेब्रल पाल्सी है। निगलने में कठिनाई और आँखों की मांसपेशियों में असंतुलन, जिसके कारण आँखें एक ही वस्तु पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पातीं, सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित लोगों में आम हैं। अगर आपके आसपास किसी बच्चे को इस तरह की परेशानी होती है तो कृपया उसे एक बार फिजियोथेरेपिस्ट को जरुर दिखाएं। उक्त विचार महाराष्ट्र मंडल की फिजियोथेरेपिस्ट डा. संगीता कश्यप ने विश्व फिजियोथेरपी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं।

डा. संगीता ने कहा कि  बच्चों के फिजियोथेरेपिस्ट बच्चों की शारीरिक क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं। वे नवजात शिशुओं से लेकर किशोरों तक के रोगियों का इलाज करते हैं और शिशु एवं बढ़ते बच्चे की गतिशीलता, विकास और उन्हें नुकसान पहुंचाने वाली स्थितियों की विशेष समझ रखते हैं।

अगर आपका बच्चा या आपके आसपास कोई बच्चो एड़ी उठाकर चलता है, तो आमतौर पर लोग इसे सामान्य मानते है। ऐसा है भी, लेकिन दो साल तक। दो-तीन साल की उम्र पार करने के बाद भी बच्चे एड़ी उठाकर चलता है तो उसकी मांसपेशियां बहुत कड़ी और सख्त हो चुकी है। ऐसे में उसे फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट की आवश्यकता है।