बार-बार पेशाब आना बीमारी नहीं मांसपेशियों की कमजोरी हैः डा. अंकिता काले
रायपुर। फिजियोथेरेपी को लेकर लोगों को धारणा है कि किसी सर्जरी बाद रिकवर करने के लिए इसकी आवश्यता पड़ती है। लेकिन इसके अतिरिक्त ऐसी कई समस्या है तो फिजियोथेरपी से ठीक होती है। जैसे कई लोगों क बार-बार पेशाब आने की समस्या आती है। उन्हें लगती है कि यह कोई बीमारी है। लेकिन ऐसा नहीं है, आमतौर पर बार-बार पेशाब आने की समस्या मांसपेशियों की कमजोरी के कारण होती है। इसका इलाज फिजियोथेरेपी से संभव है। उक्त विचार डा. अंकिता काले ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर मंडल में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डा. अंकिता काले ने कहा कि यूरिनरी इनकंटीनेंस यानी पेशाब पर नियंत्रण न रख पाने की समस्या के इलाज में फिजियोथेरेपी को पहला और सबसे सुरक्षित कदम माना जाता है। इसके जरिए बिना किसी दवा या सर्जरी के पेल्विक फ्लोर (श्रोणि) की कमजोर मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है, जिससे मूत्राशय पर नियंत्रण वापस पाने में मदद मिलती है।
पेल्विक फ्लोर मसल ट्रेनिंग या कीगल एक्सरसाइज फिजियोथेरेपी का सबसे मुख्य हिस्सा है। इसके तहत उन मांसपेशियों को सिकोड़ने और ढीला छोड़ने का अभ्यास कराया जाता है, जो पेशाब के बहाव को रोकती हैं।