हेमकुंड साहिब में आज अंतिम अरदास, शीतकाल के लिए बंद होंगे कपाट
2026-10-10 11:25 AM
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उत्तराखंड : हेमकुंड साहिब की यात्रा के समापन अवसर पर 4,000 से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें पाकिस्तान से आए करीब 40 सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी शामिल है। कपाट बंद होने के समारोह को लेकर गोविंदघाट और घांघरिया क्षेत्र में तैयारियां की गई हैं। सेना के बैंड की 11 टीमों और रागी जत्थों की मौजूदगी इस आयोजन को खास बनाएगी। पाकिस्तानी श्रद्धालुओं के जत्थे के आगमन को भी इस अवसर का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। ये श्रद्धालु विशेष व्यवस्था के तहत भारत पहुंचे हैं और हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्तराखंड पहुंचे हैं।
दोपहर 2 बजे बंद होंगे कपाट, सुबह से धार्मिक कार्यक्रम
कपाट बंद होने के दिन सुबह से ही गुरुद्वारे में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। कार्यक्रम के तहत सुबह 10 बजे सुखमनी साहिब का पाठ, इसके बाद गुरबाणी कीर्तन और दोपहर 12 बजे अंतिम अरदास का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसके बाद पंच प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप को निर्धारित स्थान पर विराजमान कराने की परंपरा निभाई जाएगी। सेना के बैंड की धुनों के बीच होने वाला यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे गुरुद्वारे के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
बर्फबारी के कारण बदला पहाड़ों का नजारा
हेमकुंड साहिब समुद्र तल से लगभग 4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है, जिसके कारण यात्रा को जारी रखना कठिन हो जाता है। हाल ही में क्षेत्र में बर्फबारी हुई है और गुरुद्वारे के आसपास बर्फ की मोटी परत जमने की खबर सामने आई है। ऐसे मौसम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। कपाट बंद होने के बाद ऊंचाई वाले क्षेत्र में नियमित यात्रा बंद रहती है और अगले यात्रा सीजन की शुरुआत निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है। इस बार भी शीतकालीन मौसम को ध्यान में रखते हुए 10 अक्टूबर को यात्रा का समापन किया जा रहा है।
इस साल श्रद्धालुओं की संख्या ने बनाया रिकॉर्ड
हेमकुंड साहिब की यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से भी चर्चा में रही है। सितंबर में ही यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तीन लाख से अधिक हो गई थी। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में भी दर्शन के लिए आने वालों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई। यात्रा के समापन से पहले प्रकाशित रिपोर्टों में इस सीजन में लगभग 3.75 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी दी गई है। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बताई गई है। हालांकि अंतिम आंकड़े में बदलाव संभव है। देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु यहां मत्था टेकने पहुंचे।
अगले साल फिर खुलेंगे कपाट
हेमकुंड साहिब सिख समुदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल है। हर वर्ष गर्मियों में यहां यात्रा शुरू होती है और मौसम अनुकूल रहने तक श्रद्धालु दर्शन करते हैं। सर्दियों में बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कपाट बंद कर दिए जाते हैं। 10 अक्टूबर को होने वाला समापन समारोह इसी वार्षिक परंपरा का हिस्सा है। कपाट बंद होने के साथ इस वर्ष की यात्रा संपन्न हो जाएगी। इसके बाद श्रद्धालुओं को अगले यात्रा सीजन का इंतजार करना होगा। फिलहाल इस अवसर पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक कार्यक्रम, अंतिम अरदास और गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान में आयोजित होने वाली परंपराएं मुख्य आकर्षण रहेंगी।