रायपुर

अवकाश को अधिकार न समझे, यह एक सुविधा और व्यवस्थाः डॉ तपेश गुप्ता

रायपुर। अवकाश को अधिकार न समझे, यह एक सुविधा और व्यवस्था है। सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली छुट्टियों से संबंधित नियम हैं। ये नियम विभिन्न प्रकार की छुट्टियों जैसे अर्जित अवकाश, अर्ध-वेतन अवकाश, आकस्मिक अवकाश, मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश और अध्ययन अवकाश आदि को परिभाषित करते हैं। उक्ताशय के विचार अपर संचालक क्षेत्रीय कार्यालय उच्च शिक्षा एवं प्राचार्य छत्तीसगढ़ महाविद्यालय रायपुर डॉ तपेश गुप्ता ने डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर आयोजित एफडीपी प्रोग्राम के तहत कहीं।

गुप्ता ने आगे कहा कि अर्जित अवकाश कर्मचारियों को उनके सेवाकाल के दौरान अर्जित होता है और इसे भविष्य में उपयोग करने के लिए जमा किया जा सकता है। अर्ध-वेतन अवकाश चिकित्सा कारणों से या निजी कार्यों के लिए लिया जा सकता है। आकस्मिक अवकाश  कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में या छोटे-मोटे कार्यों के लिए दिया जाता है। मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों को बच्चे के जन्म के समय दिया जाता है। पितृत्व अवकाश पुरुष कर्मचारियों को उनकी पत्नी के बच्चे के जन्म के समय दिया जाता है। अध्ययन अवकाश कर्मचारियों को अपनी शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए दिया जाता है। विशेष आकस्मिक अवकाश सांस्कृतिक, खेल या अन्य विशेष अवसरों पर दिया जाता है।

गुत्पा ने आगे कहा कि अवकाश नियमों को समय-समय पर संशोधित किया जाता है, इसलिए नवीनतम नियमों की जानकारी रखना आवश्यक है। अवकाश से संबंधित किसी भी प्रश्न या समस्या के लिए अपने विभाग या संगठन के विभाग से संपर्क करना उचित है। महामारी अवकाश के अंतर्गत 30 दिन की छुट्टी प्रदान किया जाता है। साथ ही चिकित्सा खर्च भी दिया जाता है।

विषय विशेषज्ञ ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनके जिज्ञासाओं को शांत किया। डॉ श्रद्धा मिश्रा सहायक प्राध्यापक अर्थशास्त्र ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया तथा डॉ सीमा रानी प्रधान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उक्त एफडीपी प्रोग्राम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ाधिकारी,  ग्रंथपाल, कार्यालयीन अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में अन्य संस्थाओं के प्रतिभागी उपस्थित रहे। बुधवार 23 जुलाई को कार्यालय प्रबंधन विषय पर के के बाजपेई, सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव छत्तीसगढ़ का उद्बोधन होगा।