रायपुर

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26.... मजबूत अर्थव्यवस्था की स्पष्ट तस्वीरः शताब्दी पांडे,

रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 यह साफ़ संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिरता और तेज़ विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत ने संतुलित नीतियों के दम पर बेहतर प्रदर्शन किया है। सर्वेक्षण के अनुसार देश की वास्तविक जीडीपी 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जबकि महंगाई घटकर 1.7 प्रतिशत रह गई है। इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है और रोज़मर्रा के खर्चों पर दबाव कम हुआ है।

सरकार ने अपने खर्च का बड़ा हिस्सा अब पूंजीगत कार्यों पर केंद्रित किया है। कुल सरकारी खर्च में पूंजीगत व्यय की हिस्सेदारी बढ़ने से सड़क, पुल, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति मिली है। इसका सीधा असर राज्यों और ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, जहाँ कनेक्टिविटी और सुविधाओं में सुधार हुआ है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी सर्वेक्षण सकारात्मक संकेत देता है। पिछले पाँच वर्षों में कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि 4.4 प्रतिशत रही है। धान उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन ग्रामीण आय का मजबूत आधार बनता जा रहा है। दुग्ध उत्पादन और पशु आधारित गतिविधियों से किसानों को अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिल रहे हैं। इथेनॉल मिश्रण नीति से देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, जिससे भविष्य में किसानों को वैकल्पिक फसलों और नई कृषि संभावनाओं का लाभ मिल सकता है।

बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2014 के बाद देश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क लगभग 60 प्रतिशत बढ़ा है। बेहतर सड़कों से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुँचाने में सुविधा मिली है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। हवाई संपर्क बढ़ने से व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी प्रोत्साहन मिला है।

शिक्षा और मानव विकास के क्षेत्र में भी सुधार दर्ज किया गया है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर नामांकन दर 90 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में मदद मिली है। इससे युवा वर्ग भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अधिक सक्षम बन रहा है।

महिलाओं की भागीदारी को आर्थिक सर्वेक्षण में विकास की अहम कड़ी माना गया है। महिलाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से उन्हें आर्थिक संबल मिला है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सशक्त भूमिका निभा रही हैं। इससे स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

कुल मिलाकर आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 यह दर्शाता है कि देश की अर्थव्यवस्था न केवल मजबूत हो रही है, बल्कि उसका लाभ ज़मीन पर भी दिखाई दे रहा है। कृषि, सड़क, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों पर दिया गया ध्यान आने वाले वर्षों में विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

(लेखक भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता है)