रायपुर

पितृसत्तात्मक समाज ही लैंगिक असमानता का कारणः डॉ सुरेंद्र कुमार

रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में आइक्यूएसी के अंतर्गत लैंगिक समावेशन एवं समानता पहल पर सात दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत आज चतुर्थ दिवस लैंगिक समावेशन एवं समानता पहल:एक विधिक दृष्टि विषय पर विषय विशेषज्ञ डॉ सुरेंद्र कुमार एसोसिएट प्रोफेसर केंद्रीय विश्वविद्यालय साउथ बिहार गया ने अपने उद्बोधन में कहा कि पितृसत्तात्मक समाज को लैंगिक असमानता का प्रमुख कारण माना और कहा कि भारत में पैतृक संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के तहत होता है, जिसमें बेटों और बेटियों को जन्म से बराबर का हक मिलता है।

यह संपत्ति चार पीढ़ियों तक चली आ रही पूर्वजों की संपत्ति मानी जाती है, जिसमें वसीयत के बिना मौत होने पर वारिसों का समान अधिकार होता है,चाहे पिता 2005 से पहले जीवित रहे हों या नहीं।बेटा हो या बेटी,पैतृक संपत्ति में सभी को जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त है।बंटवारे के लिए वंशावली,खतियान और संपत्ति के कागजात जरूरी हैं।यदि आपसी सहमति से बंटवारा न हो, तो सिबिल कोर्ट में 'पार्टीशन सूट'दायर किया जा सकता है।पति की मृत्यु के बाद पत्नी (मां) भी संपत्ति में हिस्सेदार होती है।प्रश्न है कि आखिर पैतृक संपत्ति के लिए महिला को न्यायालय जाने की जरूरत क्यों है।

जिस प्रकार से पुरुषों को पैतृक संपत्ति में स्वत: अधिकार है वैसे ही महिलाओं को भी होना चाहिए।व्यस्क व्यक्ति को अपने पसंदीदा महिला या पुरुष से शादी करने अधिकार है लेकिन आज भी समाज उसे स्वीकार करता है। कानून के द्वारा ही समाज की कुरीतियों को दूर किया जा सकता है।इसलिए समाजिक परिवर्तन के साथ ही साथ कानून में बदलाव और निर्माण होना जाना चाहिए।न्यायालय समानता और न्याय का संरक्षक हैं।कार्य स्थल पर होने वाले लैंगिक असमानताओं एवं शोषणों के रोकथाम लिए विशाखा कमेटी बनाई गई।इसी तरह से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ भी अनेक प्रकार के सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक एवं अन्य सभी प्रकार की असमानताओं का व्यवहार किया जाता है।

आज भी समाज में खाप पंचायतें जीवित है जो व्यक्ति को अपने पसंदीदा जीवन साथी चुनने का अधिकार से वंचित रखता है।साथ ही समलैंगिक विवाह को समाजिक रुप से मान्यता नहीं मिली है।इन सभी समस्याओं का समाधान सिर्फ कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि समाज में सुधार और लोगों के मानसिकता को बदलने की भी जरूरत है।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ सीमा रानी प्रधान ने किया।वक्ता का परिचय डॉ निधि गुप्ता ने दिया। डॉ स्मृति शर्मा ने आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष,वरिष्ठ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक,अतिथि व्याख्याता,ग्रंथपाल सहित कार्यालयीन अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।