राजकुमार कॉलेज में कॉफ़ी एंड कनेक्ट... बढ़ता स्क्रीन टाईम छीनता बच्चों की मुस्कुराहट पर चर्चा
रायपुर। राजकुमार कॉलेज रायपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा एक पैनल डिस्कशन एवं कक्षा छठवीं के अभिभावकों के लिए पीटीएम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था "बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाईम के कारण उनकी मुस्कुराहट छिन रही है, उन्हें पुनः सीखने के लिए कैसे प्रेरित करें?" कार्यक्रम का आरंभ कक्षा बारहवीं की छात्रा हरसिफत कौर ने पैनल के विशेषज्ञों और अभिभावकों के स्वागत से किया।
पैनल डिस्कशन के संचालक बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरिंदम बैनर्जी थे। पैनल के विशेषज्ञों में डॉ.मनोज पांडे ने बताया कि तकनीक का उपयोग करना समस्या नहीं है बल्कि उस पर निर्भरता एक समस्या है, जब हम पर्यावरण से दूर हो जाते हैं तब मानव मस्तिष्क की सामान्य गतिविधियों में बाधा उत्पन्न होती है।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. नकुल उप्पल ने बताया आज से 10 साल पहले उनके पास इलाज के लिए आने वाले अभिभावक और बच्चे अपनी बारी आने तक आराम से प्रतीक्षा करते थे या आपस में बातचीत करते थे पर आज वे प्रतीक्षा का समय अपने फोन पर बिताते हैं। उन्होंने ये भी बताया कि फोन का अधिक उपयोग करने वालों के साथ दुर्घटनाएं भी अधिक होती हैं और वे जंक फूड का सेवन भी अधिक करते हैं जिसके कारण मोटापा, फैटी लीवर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप हो सकता है।
राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल अविनाश सिंह ने कहा कि तकनीक का प्रयोग हमें अपने ज्ञान के विकास के लिए करना चाहिए न कि हमें उसकी लत होनी चाहिए, आज का युवा वर्ग सोशल मीडिया से अत्यधिक प्रभावित है।
डॉ. बाती पांडे ने अपने उद्बोधन में बताया कि डोपामाइन एक न्यूरो ट्रांसमीटर हॉर्मोन है, जब हम अपनी खुशी के लिए कोई कार्य करते हैं तब यह निकलता है और जब हम मोबाइल का उपयोग करते हैं तब ये हमारे मस्तिष्क में से बार बार निकलता है और व्यक्ति को इसके बार-बार उपयोग की लत लग जाती है परंतु इससे आपसी बातचीत, एकाग्रता कम होती जाती है। हमारे मस्तिष्क की संरचना एक समय में एक कार्य करने के लिए है और हम 60-60 सेकंड की रील देखकर अपने मस्तिष्क पर अनावश्यक दबाव डालते हैं और उसे भ्रमित कर देते हैं।
डॉ. सोनल शुक्ला ने बताया कि मोबाइल की नीली लाइट हमारी नींद के चक्र को भी बाधित करती है और विद्यालय में भी इसके कारण सिर दर्द, डिप्रेशन और पैनिक अटैक आ सकते हैं इसलिए इस समस्या के हल के रूप में 7-7-7 रूल अपनाना चाहिए, इसमें जब बच्चा सोकर उठता है तो उसे 7 मिनट तक अलग-अलग कामों में व्यस्त रखें फिर स्कूल के काम के बाद 7 मिनट उसके दिन के बारे में पूछें और रात को सोने से पहले 7 मिनट किताबें पढ़ने या दिन भर की बातें शेयर करने दें। केवल 30 मिनट का स्क्रीन टाईम दें और उसके बाद टहलना या किसी चीज़ को 30 फीट की दूरी से देखने जैसी गतिविधियाँ करवाएँ।
राजकुमार कॉलेज के शिक्षक अक्षय पीआर ने बताया कि जब हम सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं तो हमें अपने समय, श्रम और लक्ष्य का संतुलन बनाना आवश्यक है। राजकुमार कॉलेज के बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी इवान नरोहा ने कहा- हमारा युग ए.आई. का युग है। आज के बच्चे अंतर्मुखी होते जा रहे हैं, वे अपने अभिभावकों की बात नहीं मानते। इसके लिए उन्हें कुछ रचनात्मक कार्यों से जोड़कर माता-पिता को भी उनकी रुचि को पहचानते हुए उनके साथ सहभागी होने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य द्वारा सभी विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया और मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी श्रीमती शीतल सरना द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।