जहां कभी नक्सलवाद का था बोलबाला, वहां अब खेलों का हो रहा उदय
2026-04-02 12:30 PM
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रायपुर| छत्तीसगढ़ की धरती, जो कभी नक्सलवाद की छाया में जकड़ी हुई थी, आज खेलों की गूंज से रोशन हो रही है। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के दौरान कहा—“खेल उस क्षेत्र में नई उम्मीद लेकर आया है, जिसकी पहचान कभी संघर्ष से होती थी।” यह आयोजन न केवल खेलों का उत्सव है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक भी बन गया है।
ऊर्जा, आशा और बदलाव का संगम
बुधवार को रायपुर पहुंचीं खडसे ने यहां के माहौल को ऊर्जा, आशा और बदलाव से भरपूर बताया। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की टीम की सराहना करते हुए कहा कि एथलीटों और स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। इस आयोजन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2,500 से अधिक आदिवासी एथलीट हिस्सा ले रहे हैं।
नक्सलवाद से खेल तक की यात्रा
खडसे ने कहा कि एक समय था जब छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के लिए जाना जाता था और यहां के लोगों को पिछड़ा समुदाय माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है और खेलों के माध्यम से यहां के युवा अपनी ऊर्जा और क्षमता को सामने ला रहे हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन, गृह मंत्री अमित शाह, कैबिनेट मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और पूरी साई टीम को दिया।
भविष्य के ओलंपियन
खडसे ने भरोसा जताया कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले कई एथलीट आगे चलकर ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने 2,500 से अधिक आदिवासी एथलीटों को “भविष्य का ओलंपियन” बताते हुए कहा कि यह मंच उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
अस्मिता लीग का प्रभाव
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में अस्मिता लीग के पूर्व छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया। हॉकी, वेटलिफ्टिंग और फुटबॉल में लगभग 60 से 70 प्रतिशत लड़कियां अस्मिता लीग से जुड़ी रही हैं और पदक जीत चुकी हैं। तैराकी में जीते गए सभी पांच स्वर्ण पदक भी इसी लीग की खिलाड़ियों ने हासिल किए। अंजली मुंडा जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस सफलता की मिसाल बनीं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
खडसे ने कहा कि अस्मिता लीग, जिसे 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के विजन के तहत शुरू किया गया था, ग्रामीण भारत की महिलाओं को प्रतिस्पर्धी खेलों में लाने का प्रयास है। उन्होंने वादा किया कि इस लीग को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा ताकि महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती रहे और खेलों में उनकी पहचान और मजबूत हो।