रायपुर

पुणे में देवलोक गमन हुई प. पू. प्रीतिसुधाजी म. सा. को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

अजय मधुकर काले - अध्यक्ष, महाराष्ट्र मंडल, रायपुर

रायपुर। श्रद्धेय प्रीतिसुधाजी म. सा. के निधन से जैन समाज सहित संपूर्ण समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। दादाबाड़ी में उनके प्रवचन से पूरे छत्तीसगढ़  में जो वाणी विचार प्रवाहित हुए थे उस समय की बात और चर्चा का यदि जिक्र करूं तो याद आते है ऐसे कई प्रसंग जिसमें कईयों की नशामुक्ति हुई। चरित्र का निर्माण हुआ। लोग सद्भावना के साथ प्रेम से मिलते थे। तब महसूस हुआ था कि जैन धर्म जन जन का है। सभी समाज के लोगों को आप देख सकते थे उनके प्रवचन में। उस समय विभिन्न समाज अपने अपने क्षेत्र मे उनकी उपस्थिति सम्मान प्रवचन कराना चाहते थे। 1995 में महाराष्ट्र मंडल, हनुमान मंदिर, तात्यापारा, रायपुर के चातुर्मास के दौरान अपनी रसमय वाणी में दिए गए उनके प्रवचन आज भी लोगों की स्मृतियों में ताज़ा हैं।मराठी भाषा पर उनका अगाध प्रभुत्व था और उनके शब्दों से सदैव मानवता का संदेश मिलता था। धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और सरल भाषा में उनके मार्गदर्शन ने अनेक भक्तों के जीवन को सन्मार्ग पर अग्रसर किया। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से न केवल धर्म, बल्कि समाज सुधार और नैतिक मूल्यों के महत्व को भी अत्यंत सुंदरता से समझाया। उनके शांत और संयमित व्यक्तित्व का प्रभाव हर श्रोता पर पड़ता था, जिससे भक्तों का उनके साथ एक अटूट रिश्ता बन गया था।

पुणे की पावन धरा पर उनका देवलोक गमन हम सभी भक्तों के लिए अत्यंत दुखद और भावुक कर देने वाली घटना है। उनके जाने से जो शून्यता उत्पन्न हुई है, वह कभी भरी नहीं जा सकती; किंतु उनके विचार हम सभी को सदैव सही दिशा दिखाते रहेंगे। ऐसी महान साध्वी के चरणों में हम सभी अत्यंत नम्रता और कृतज्ञता के साथ अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर उनकी पवित्र आत्मा को चिरशांति प्रदान करे, यही हमारी मंगल प्रार्थना है।