भारत विकास परिषद की दो दिवसीय प्रांतीय कार्यशाला 'समुत्कर्ष' संपन्न
- विभिन्न क्षेत्रों में विशेष समाज सेवा हेतु लोगों को हुआ सम्मान
- राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन किया 'समुत्कर्ष' पत्रिका का विमोचन
रायपुर। भारत विकास परिषद् छत्तीसगढ़ प्रांत (मध्य क्षेत्र) द्वारा 6 एवं 7 जून को भिलाई नगर में दो दिवसीय प्रांतीय कार्यशाला “समुत्कर्ष” का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में प्रांत भर से आए लगभग 180 दायित्वधारियों ने संगठन के विस्तार, जन-कल्याणकारी सेवा प्रकल्पों, पर्यावरण संरक्षण, और महिला सशक्तिकरण जैसे ज्वलंत और महत्वपूर्ण विषयों पर गहन वैचारिक मंथन किया।
भव्य शुभारंभ एवं वैचारिक मंथन कार्यशाला के प्रथम दिन, 6 जून को प्रातः 8 बजे से देश भर से पधारे प्रतिनिधियों का पंजीकरण आरंभ हुआ। कार्यक्रम में कुशल मंच संचालन प्रांतीय महासचिव मुरारी काबरा द्वारा किया गया। सुबह 11:00 बजे कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और शशांक शुक्ल द्वारा 'वन्देमातरम्' गान के साथ हुआ। गरिमामयी उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में शंकराचार्य ग्रुप के चेयरमैन आईपी मिश्रा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और उपस्थित जनों को समाज निर्माण के संदर्भ में अपना प्रेरक उद्बोधन दिया।
कार्यशाला को भारत विकास परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने विशेष उद्बोधन में भारत विकास परिषद् के गौरवशाली परिचय एवं इसकी मूल विचारधारा पर विस्तृत प्रकाश डाला तथा संगठन की मजबूती के लिए संपर्क के महत्व पर अपना बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया । उद्घाटन सत्र के पश्चात आयोजित प्रथम एवं द्वितीय सत्रों में संगठन की रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख प्रकल्पों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
महिला सहभागिता एवं सशक्तिकरण: प्रांतीय स्तर पर महिलाओं की सक्रिय एवं सशक्त भूमिका सुनिश्चित करने हेतु प्रांतीय महिला सहभागिता संयोजिका उमा सारडा द्वारा महिला सहभागिता के प्रकल्पों की विस्तृत जानकारी दी गई। समाज में महिलाओं के नेतृत्व कौशल को उभारने पर विशेष बल दिया गया एवं कन्याओं के स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।
संस्कार एवं सेवा प्रकल्पः राष्ट्रीय गतिविधि सदस्य (संस्कार) धर्मेन्द्र कुमार कुदेसिया ने शाखाओं में संस्कार आयोजनों के मूल उद्देश्य को स्पष्ट किया। इसी कड़ी में 'भारत को जानो' प्रतियोगिता पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया और इसे व्यापक रूप से स्कूली स्तर पर आयोजित करने का आह्वान किया गया, ताकि छात्र-छात्राएं अपनी जड़ों से जुड़ सकें और प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। साथ ही, 'राष्ट्रीय समूह गान' और 'गुरु वंदन छात्र अभिनंदन' जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के सफल आयोजन के विषय में भी विस्तार से बताया गया। सेवा गतिविधियों के सुचारू संचालन पर क्षेत्रीय संयुक्त महासचिव दयाराम वाधवानी जी ने अपना मार्गदर्शन दिया और 'हिन्द की चादर गुरु तेग बहादुर बलिदान दिवस के आयोजन हेतु भी गया।
पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन: क्षेत्रीय अध्यक्ष सुनील कोठारी जी ने पर्यावरण संरक्षण पर रणनीतियां साझा कीं। इस सत्र में जल संरक्षण, पानी का सदुपयोग करने और फिजूलखर्ची रोकने पर विशेष और गंभीर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और मृदा (मिट्टी) प्रदूषण के बढ़ते खतरों पर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण संतुलन के लिए अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने एवं उनका संरक्षण व संवर्धन करने पर जोर दिया गया।
संपर्क, संगठन विस्तार एवं प्रोटोकॉल: प्रांतीय संगठन सचिव किशोरी लाल लाठ ने सदस्यता विस्तार पर अपने विचार रखे। वहीं, क्षेत्रीय महासचिव सुधीर अग्रवाल द्वारा परिषद् के प्रोटोकॉल एवं नियमों का संक्षिप्त वर्णन किया गया। संगठन के त्वरित विस्तार हेतु "एक व्यक्ति, एक नया सदस्य" (One person one new member) की नीति को प्रमुखता से अपनाने का सुझाव प्रांतीय महासचिव श्री मुरारी काबरा जी द्वारा दिया गया। श्री श्रीनाथ जी ने संपर्क विषय पर अपने अत्यंत सुंदर उद्बोधन के माध्यम से परिषद् को विस्तार देने के लिए मार्गदर्शन दिया।
पारदर्शी वित्त प्रबंधन: क्षेत्रीय लेखा परीक्षक सत्यम केसरवानी जी ने शाखाओं में वित्त प्रबंधन की बारीकियों को समझाते हुए सख्त निर्देश दिए कि दान, सदस्यता शुल्क और संस्थागत खर्चों से संबंधित सभी नियमों का उचित प्रोटोकॉल के साथ कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए ।
समूह चर्चा एवं जिज्ञासा सत्र ( Group Discussion) : संगठन, वित्त, और महिला सहभागिता जैसे विषयों पर मंचासीन वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा एक वृहद समूह चर्चा की गई, जिसमें शाखा प्रतिनिधियों की सभी शंकाओं और जिज्ञासाओं का त्वरित समाधान किया गया।
द्वितीय दिवस (7 जून 2026 ) :
कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार 7 जून को चतुर्थ सत्र की शुरुआत हुई, जिसमें सभी शाखाओं द्वारा अपने-अपने कार्यों की इकाईवार प्रस्तुति दी गई। इस सत्र में सभी शाखाओं ने अब तक किए गए कार्यों का पारदर्शी विवरण दिया तथा आगामी नवंबर माह तक की अपनी विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। कार्यशाला में शामिल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में शिक्षा के साथ संस्कारों के समन्वय को राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। इसी सत्र में परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन के कर कमलों द्वारा भारत विकास परिषद् की वैचारिक और संगठनात्मक पत्रिका 'समुत्कर्ष' का भव्य विमोचन संपन्न हुआ।
षष्ठम सत्र: उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए ऐतिहासिक सम्मान समारोह कार्यक्रम के अंतिम (षष्ठम) सत्र में समाज एवं संगठन में निस्वार्थ और उत्कृष्ट योगदान देने वाले कर्मठ सदस्यों को सम्मानित किया गया।
'विकास रत्न' से अलंकृतः
1. विनोद एवं मंजू देवी अग्रवाल
2. कृष्ण कुमार एवं उर्मिला देवी सिंघल
'विकास मित्र' से अलंकृतः
1. दीपक लिखमानिया 2. हनुमान प्रसाद रमुका 3. विष्णु प्रसाद अग्रवाल 4. गोविंद प्रसाद अग्रवाल
5. मधु जी गौड़ 6. सुशील अग्रवाल
अंशदान एवं विशेष संगठनात्मक उपलब्धियों हेतु सम्मान:
अप्रैल माह में उत्कृष्ट अंशदान हेतुः सुधर्मा शाखा, राजनांदगांव शाखा, संकल्प शाखा, भिलाई शाखा, वैशाली शाखा, मिनीमाता शाखा और कोरबा शाखा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यशाला से पूर्व सर्वाधिक अंशदान देने वाली शाखाएं: संकल्प शाखा (76 सदस्यों के सहयोग से) एवं भिलाई शाखा (70 सदस्यों के सहयोग से) अग्रणी रहीं ।
नई शाखा में सर्वाधिक सदस्यता हेतु: नवगठित रायगढ़ शाखा को उनके अभूतपूर्व सदस्यता अभियान के लिए सम्मानित किया गया।
विभिन्न क्षेत्रों में विशेष समाज सेवा हेतु सम्मान: परिषद् ने उन समाजसेवियों को भी मंच पर सम्मानित किया जिन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव लाया है:
1. संजय चोपड़ा (छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित ): अस्पताल में मरीजों एवं परिजनों के लिए निरंतर प्रतिदिन मुफ्त भोजन सेवा के उत्कृष्ट कार्य हेतु ।
2. सत्यनारायण मित्तल: स्पीच थेरेपी ( Speech Therapy) सेवा क्षेत्र में आजीवन योगदान हेतु ।
3. विनोद कुमार बच्छानी : शिक्षा के क्षेत्र में (सरस्वती शिशु मंदिर के प्रमुख के रूप में) उत्कृष्ट सेवा हेतु ।
4. उर्मिला देवी (साहित्य रत्न सम्मान से विभूषित): साहित्य क्षेत्र में उनके सृजनात्मक योगदान हेतु ।
5. संगीता कश्यप: स्वास्थ्य एवं फिजियोथेरेपी सेवा क्षेत्र में निस्वार्थ कार्य हेतु ।
6. नमन जैनः गौ सेवा एवं पशु कल्याण के प्रति उनके समर्पण हेतु ।
7. रंजीता एवं तुमन चंद साहू : बच्चों में संस्कार सिंचन एवं गौ सेवा के पुनीत कार्य हेतु तथा संस्कार के एक प्रकल्प "मैं हूँ गुल्लक" अभियान के अंतर्गत इनके बच्चों को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया है।
इसी दिन दोपहर में दुर्ग संभाग के प्रबुद्ध जनों के साथ राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन, क्षेत्रीय अध्यक्ष सुनील कोठारी क्षेत्रीय महासचिव सुधीर अग्रवाल एवं अन्य राष्ट्रीय व प्रांतीय पदाधिकारियों की एक विशेष परिचर्चा एवं संगोष्ठी का भी अत्यंत सफल आयोजन किया गया, जिसमें समसामयिक सामाजिक विषयों पर दिशा तय की गई।
स्थायी प्रकल्पों का अवलोकन एवं भावी कार्ययोजना इस दो दिवसीय प्रांतीय कार्यशाला के समापन अवसर पर भिलाई इकाई द्वारा संचालित किए जा रहे उत्कृष्ट स्थायी प्रकल्पों का विशेष और सघन निरीक्षण भी किया गया। पदाधिकारियों ने सर्वप्रथम पंचशील पंजाबी पैलेस, सेक्टर 5, भिलाई में स्थित 'स्वर्गारोहण रथ' के वाहन एवं गैरेज का बारीकी से निरीक्षण किया और इस जन सुविधा की सराहना की।
इसके साथ ही, जनसामान्य को किफायती स्वास्थ्य लाभ पहुँचाने वाले 'भारत विकास परिषद् भौतिक चिकित्सा केंद्र (Physiotherapy Centre)' का अवलोकन किया गया तथा भविष्य में इसके आधुनिकीकरण एवं विस्तार पर चर्चा की गई।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाते हुए, परिषद् द्वारा भविष्य के लिए प्रस्तावित 'डायगनोस्टिक केंद्र एवं डायलिसिस केंद्र' के निर्माण हेतु चिन्हित भूमि का अवलोकन भी कार्यशाला के दौरान उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का भव्य और भावपूर्ण समापन राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ। भिलाई शाखा की ओर से श्री कृष्ण कुमार सिंघल जी द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों, राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों, प्रबुद्ध नागरिकों और मातृशक्ति के प्रति हृदय से आभार प्रदर्शन (Vote of Thanks) किया गया। इस प्रकार, भिलाई की धरती पर आयोजित यह प्रांतीय कार्यशाला 'समुत्कर्ष' परिषद् के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई।