एनआईटी रायपुर ने उन्नत अनुप्रयुक्त गणित और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर राष्ट्रीय अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के गणित विभाग ने संस्थान के सतत शिक्षा प्रकोष्ठ (सीईसी) के सहयोग से आज पांच दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एसटीटीपी) का उद्घाटन किया। "फ्रंटियर्स इन एप्लाइड मैथमेटिक्स: मॉडलिंग, नॉनलीनियर डायनामिक्स, कैओस, फ्रैक्टल ज्योमेट्री एंड क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (एफएमएनसीएफक्यू-2026)" शीर्षक से आयोजित यह कार्यक्रम 7 सितंबर से 11 सितंबर 2026 तक संचालित होगा। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों से 65 शोधकर्ताओं एवं संकाय सदस्यों सहित इथियोपिया से एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
मुख्य संरक्षक के रूप में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एनआईटी रायपुर के निदेशक (प्रभारी) प्रो. समीर बाजपेयी ने प्रतिभागियों से सैद्धांतिक सिद्धांतों से आगे बढ़कर कम्प्यूटेशनल सॉफ्टवेयर और अंतर-विषयक अनुप्रयोगों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कार्यक्रम की वास्तविक सफलता सहयोगी शोध पत्रों के प्रकाशन, प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं और सुदृढ़ शैक्षणिक नेटवर्क जैसे ठोस परिणामों पर निर्भर करेगी। मुख्य अतिथि आईआईटी रोपड़ के प्रो. अरविंद कुमार गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए आधुनिक तकनीकी और वैज्ञानिक चुनौतियों के समाधान में कैओस थ्योरी, गैर-रेखीय प्रणालियों तथा क्वांटम क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथि एनआईटी रायपुर के कुलसचिव प्रो. नरेंद्र डी. लोंधे ने समकालीन इंजीनियरिंग प्रणालियों की जटिलता पर चर्चा की और उपस्थित प्रतिभागियों को गणित, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सिग्नल प्रोसेसिंग तथा भौतिकी के अभिसरण का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। सतत शिक्षा कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. सुभोजित घोष एवं गणित विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुजीत कुमार सामंत ने बताया कि किस प्रकार अनुप्रयुक्त गणित विश्लेषणात्मक चिंतन को विकसित करता है और वास्तविक औद्योगिक व जैविक समस्याओं के समाधान के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।
इससे पूर्व उद्घाटन सत्र में एसटीटीपी समन्वयक डॉ. शारदा नंदन राव एवं डॉ. दीपमाला शर्मा ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और कार्यक्रम की शैक्षणिक रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान जैसे आधुनिक क्षेत्रों में व्यावहारिक गणितीय मॉडलिंग पर बल दिया गया। उद्घाटन सत्र का समापन समन्वयक डॉ. लवुद्या भास्कर द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।