23 साल की होते ही मोनिका को मिले 10 लाख रुपये, पीएम केयर्स योजना बनी सहारा
2026-11-04 07:20 AM
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रायपुर : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की मोनिका बघेल को केंद्र सरकार की पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना (PM CARES for Children Scheme) के अंतर्गत बड़ी आर्थिक सहायता मिली है। 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर मोनिका के खाते में 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता राशि अंतरित की गई है। इस अवसर पर जिला कलेक्टर ने उन्हें प्रतीकात्मक डेमो चेक प्रदान किया। भारत सरकार की ओर से योजना के प्रावधानों के तहत यह राशि उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी से प्रभावित पात्र बच्चों को वयस्क होने के बाद आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए मजबूत आधार देना है।
कलेक्टर ने मोनिका बघेल को सौंपा डेमो चेक
मोनिका बघेल को सहायता राशि प्रदान किए जाने के अवसर पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अपर कलेक्टर, जिला कार्यक्रम अधिकारी और जिला बाल संरक्षण अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा संस्थागत एवं गैर-संस्थागत देखरेख से जुड़े संरक्षण अधिकारी, मिशन शक्ति के परियोजना समन्वयक, मिशन वात्सल्य के अधिकारी-कर्मचारी और मोनिका के संरक्षक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। जिला प्रशासन की ओर से मोनिका को प्रतीकात्मक चेक सौंपा गया। वास्तविक सहायता राशि भारत सरकार की ओर से उनके खाते में अंतरित की गई है।
क्या है पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना?
पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना की घोषणा 29 मई 2021 को की गई थी। इस योजना का उद्देश्य कोविड-19 महामारी के दौरान माता-पिता या पात्र अभिभावकों को खोने वाले बच्चों को दीर्घकालिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, संरक्षण और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें ऐसे बच्चों को शामिल किया गया है, जिन्होंने निर्धारित कोविड अवधि के दौरान अपने माता-पिता दोनों, जीवित बचे एकमात्र अभिभावक, कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता को खो दिया हो और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करते हों। सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करना है।
23 वर्ष की उम्र में कैसे मिलते हैं 10 लाख रुपये?
योजना के वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक पात्र लाभार्थी के लिए ऐसा कोष तैयार किया जाता है, जिसकी राशि 18 वर्ष की आयु तक 10 लाख रुपये हो जाती है। इस राशि के निवेश से लाभार्थी को 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद 23 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। 23 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान है। बालोद जिले की मोनिका बघेल को इसी प्रावधान के अंतर्गत सहायता राशि मिली है। यह राशि उनके भविष्य की आर्थिक जरूरतों, आगे की पढ़ाई, कौशल विकास, रोजगार या स्वरोजगार जैसी आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा का भी प्रावधान
पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है। योजना के पात्र लाभार्थियों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। स्कूली शिक्षा के लिए आवश्यक सहयोग के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भी सहायता दी जाती है। पात्र विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और व्यावसायिक या उच्च शिक्षा संबंधी ऋण सहायता की व्यवस्था भी योजना का हिस्सा है। इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोविड महामारी से प्रभावित बच्चों की पढ़ाई आर्थिक कठिनाइयों के कारण बाधित न हो और उन्हें बेहतर भविष्य बनाने के अवसर मिल सकें।
मोनिका को मिली सहायता से आत्मनिर्भरता की राह होगी आसान
मोनिका बघेल को 10 लाख रुपये की सहायता मिलना योजना के दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग का एक उदाहरण है। यह राशि ऐसे समय उपलब्ध कराई गई है, जब वे 23 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं और जीवन के अगले चरण में आगे बढ़ रही हैं। केंद्र सरकार की इस योजना में बचपन से लेकर युवावस्था तक सहायता देने की व्यवस्था की गई है। पहले शिक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा, फिर 18 से 23 वर्ष के बीच मासिक वित्तीय सहयोग और उसके बाद एकमुश्त राशि उपलब्ध कराई जाती है।