अभिजीत के बॉलीवुड गीत, सुनील सोनी की लोकधुनें; राज्योत्सव में छाया संगीत का जादू
2026-11-04 09:23 AM
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रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड के सदाबहार गीतों और छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत का शानदार संगम देखने को मिला। नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मेला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड के प्रसिद्ध पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और लोक कलाकार उषा बारले की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहीं। वहीं शिल्प ग्राम मंच पर पंथी नृत्य, कथक, आदिवासी लोकनृत्य, सूफी संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई। तीन दिवसीय राज्योत्सव के अंतिम दिन संगीत और कला के विविध रंग देखने को मिले। एक ओर हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय गीतों की गूंज सुनाई दी, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ी गीतों में प्रदेश की माटी, मया और लोकजीवन की भावनाएं झलकती रहीं। लोककलाओं और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने आयोजन को सांस्कृतिक विविधता से भर दिया।
बॉलीवुड गायक अभिजीत के सदाबहार गीतों ने बांधा समां
राज्योत्सव की अंतिम शाम बॉलीवुड के मशहूर पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य के नाम भी रही। उन्होंने अपनी लोकप्रिय फिल्मों के सदाबहार गीत प्रस्तुत कर संगीतप्रेमियों का मनोरंजन किया। अभिजीत ने 'चांद तारे' जैसे चर्चित गीत से हिंदी फिल्म संगीत की यादें ताजा कर दीं। इसके बाद 'बादशाह ओ बादशाह' की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। वहीं 'बहुत खूबसूरत हो' और 'वादा रहा सनम' जैसे रोमांटिक गीतों ने सांस्कृतिक संध्या को सुरमयी बना दिया। उनके गीतों के माध्यम से राज्योत्सव के मंच पर बॉलीवुड संगीत के अलग-अलग रंग देखने को मिले।
सुनील सोनी के गीतों में गूंजी छत्तीसगढ़ की माटी की महक
छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में स्थानीय संस्कृति की मिठास घोल दी। उन्होंने ऐसे गीत प्रस्तुत किए, जिनमें प्रदेश की मिट्टी से जुड़ाव, माता-पिता के प्रति सम्मान और प्रेम की भावनाएं दिखाई दीं। सुनील सोनी ने 'छैंया भुइंया ला छोड़ तैं' गीत के माध्यम से छत्तीसगढ़ की धरती के प्रति लगाव को स्वर दिया। इसके बाद 'झन भूलौ मां-बाप ला' गीत ने माता-पिता के त्याग और सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने 'मीठ-मीठ लागे मया के बानी' और छत्तीसगढ़ी फिल्म 'हांडा' के लोकप्रिय गीत 'ए गोरी ओ गोरी' की भी प्रस्तुति दी। उनके गीतों ने राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।
उषा बारले की पंडवानी प्रस्तुति ने जीवंत की लोकगाथाओं की परंपरा
राज्योत्सव के अंतिम दिन प्रसिद्ध लोक कलाकार उषा बारले ने पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकगाथा परंपरा को मंच पर जीवंत किया। उनकी प्रस्तुति के माध्यम से प्रदेश की लोककला, पारंपरिक गायन शैली और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। पंडवानी छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोककला विधाओं में शामिल है। इसके माध्यम से महाभारत से जुड़ी कथाओं को गायन और कथात्मक शैली में प्रस्तुत किया जाता है। राज्योत्सव के मंच पर इस लोकविधा की प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या का महत्वपूर्ण आकर्षण रही।
शिल्प ग्राम मंच पर 10 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बिखेरे रंग
मुख्य सांस्कृतिक मंच के साथ शिल्प ग्राम मंच पर भी कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यहां भजन गायन, पंथी नृत्य, लोकमंच, जसगीत-जगराता, आदिवासी लोकसंगीत, कथक, सूफी संगीत और नाटक सहित कुल 10 प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। रायपुर की आस्था भट्ट ने भजन गायन के माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत भक्तिमय वातावरण में की। इसके बाद दुर्ग की आरती बारले और रायपुर के दिनेश कुमार जांगड़े के दलों ने पंथी नृत्य प्रस्तुत किया। पंथी नृत्य की पारंपरिक शैली और सामूहिक प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोकनृत्य परंपरा का परिचय कराया। कबीरधाम के राकेश सेन के नेतृत्व में लोकमंच की प्रस्तुति हुई। रायपुर की पूर्णिमा साहू ने जसगीत-जगराता भजन प्रस्तुत कर देवी आराधना की परंपरा को स्वर दिया। वहीं अभिषेक सोनकर के दल ने आदिवासी लोकसंगीत और नृत्य के माध्यम से जनजातीय संस्कृति के विविध रंग प्रस्तुत किए।
कथक और सूफी संगीत ने बढ़ाई सांस्कृतिक संध्या की रौनक
शिल्प ग्राम मंच पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की भी मनमोहक झलक देखने को मिली। दीपाली पांडेय के दल ने कथक समूह नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि अनुष्णा रॉय चौधरी ने कथक की एकल प्रस्तुति से कला की लय, ताल और भाव-भंगिमाओं को मंच पर उतारा। वृधुमन वचस्पति भारती ने सूफी संगीत की प्रस्तुति दी। वहीं आनंदकुमार पांडेय के दल ने नाटक के माध्यम से रंगमंचीय कला का प्रदर्शन किया। इस तरह छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की अंतिम सांस्कृतिक संध्या लोककला और आधुनिक संगीत के सुंदर संगम के साथ संपन्न हुई। बॉलीवुड के लोकप्रिय नगमों से लेकर छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों तक, कलाकारों की प्रस्तुतियों ने प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर प्रदर्शित किया।