भारतीय ज्ञान परंपरा में दक्षता निर्माण पर कार्यशाला का आज तृतीय दिवस
2025-03-02 05:20 PM
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रायपुर। मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागार में संचालित कार्यशाला में आज के प्रमुख वक्ताओं में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रथम सत्र के वक्ता डॉ रनंजय कुमार सिंह ने भारतीय ज्ञान परम्परा का गणित विषय को दिए गए योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया की हमारी प्राचीन भारतीय गणितीय ज्ञान सम्पूर्ण विश्व को प्रकाशित करते हुए वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करने की क्षमता है। इसके सिद्धांत जितने पूर्व में प्रासंगिक रहे हैं, आज भी उतना ही प्रासंगिक हैl इस ज्ञान ने वैज्ञानिक विकास में अपना बहुमूल्य योगदान दिया हैl
जिसके कारण नित नये अनुसन्धान एवं तकनीकी विकास संभव हो पा रहा हैl इस प्राचीन ज्ञान को जनसामान्य तक पहुंचना इसका उद्देश्य रहा हैl उन्होंने इसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया की इसकी जड़े बहुत मजबूत है एवं यह सुदूरवर्ती क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों के जीवन में अविभाज्य रूप से समाहित रहा है जिन्हे समाज में प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता हैl वही द्वितीय वक्ता के रूप में डॉ एन आर पवार ने प्राचीन भारतीय ज्ञान में रसायन विज्ञान के उद्भव एवं उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया की वेद एवं उपनिषद जो सदियों पुराना ज्ञान है जिसमें इन रसायनों के बारे में ज्ञान उपलब्ध होता है एवं ऋषि, मुनि एवं विशेषज्ञ इन ज्ञान के प्रमाणिक जानकर होते थेl
वही उन्होंने प्राचीन भारतीय क़ृषि परंपरा एवं उसकी श्रेष्ठता को रेखांकित किया एवं यह स्पष्ट करने का प्रयास किया की वह किस प्रकार पर्यावरण के लिए अनुकूल था जिससे वातावरण शुद्ध रहता थाl इस प्राचीन भारतीय ज्ञान से जहाँ एक ओर शुद्ध भोजन उपलब्ध होता था जो हमारे मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल रहाl तृतीय वक्ता के रूप में सुयश प्रधान जी ने बताया की आयुर्वेद का हमारे प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में एक महत्वपूर्ण अंग रहा है जिससे लोग दीर्घायु एवं निरोगी बने रहते थे एवं जीवन को पूर्णता के साथ जीते थे उनके जीवन में हताशा,निराशा का कोई स्थान नहीं था प्रकृति की गोद में स्वयं को सुरक्षित महसूस करता था व जीवन पूर्ण रूप से प्रकृतिमय होता था जल संरक्षण का बहुत अच्छा व्यवस्था होता था l इस तरह के ज्ञान का उपयोग परोपकार एवं जनकल्याण की भावना के साथ किया जाता था जो मानवीयता का श्रेष्ठ उदाहरण होता थाl प्रत्येक वक्ताओं के साथ प्रतिभागियों का बहुत अच्छा चर्चा महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हुआ तथा प्रत्येक प्रश्न का उत्तर वक्ताओं द्वारा दिया गयाl
वही समस्त प्रतिभागियों में ज्ञान प्राप्ति के लिए उत्साह अभूतपूर्व रहा एवं सभी ने इस बहुमूल्य ज्ञान को सराहा l पाठ्यक्रम संयोजक प्रोफेसर आरके ब्रम्हे,मालवीय मिशन टीचर टेनिंग सेंटर के डायरेक्टर प्रीति के. सुरेश, प्रोफेसर जीके देशमुख, डाॅ. बृजेन्द्र पांडेय, डाॅ. अरविंद अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।