जल जीवन मिशनः छत्तीसगढ़ के पंचायतों में शत-प्रतिशत जलापूर्ति... लोकसभा में बोले जल शक्ति राज्य मंत्री
रायपुर। छत्तीसगढ़ द्वारा जेजेएम आईएमआईएस पर प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, राज्य के कांकेर, बालोद, कोंडागांव और धमतरी जिलों में क्रमशः 64, 87, 30 और 329 ग्राम पंचायतों (जीपी) में हर घर जल होने की सूचना है, यानी शत-प्रतिशत घरों को जल जीवन मिशन (जेजेएम) के अंतर्गत जलापूर्ति प्राप्त हो रही है। यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
सोमन्ना ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि जेजेएम आईएमआईएस पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, पूरे देश में 1,20,097 ग्राम पंचायतों (जिनमें छत्तीसगढ़ की 2,001 ग्राम पंचायतें शामिल हैं) को हर घर जल के रूप में उल्लेखित किया गया है। इसके अलावा, 1,14,366 योजनाएं (जिनमें छत्तीसगढ़ की 4,515 योजनाएं शामिल हैं) समुदाय को सौंपी गई हैं।
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जेजेएम आईएमआईएस पर प्रदान की गई सूचना के अनुसार, पूरे देश में 1,40,580 ग्राम पंचायतों (छत्तीसगढ़ की 9,645 ग्राम पंचायतों सहित) में नल से जल आपूर्ति का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। राज्यों ने सूचित किया है कि मिशन के कार्यान्वयन में कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं जिनमें जल-तनाव, सूखे की आशंका, रेगिस्तानी क्षेत्रों में विश्वसनीय पेयजल स्रोतों की कमी, भूजल में भू-जनित प्रदूषकों की उपस्थिति, असमान भौगोलिक क्षेत्र, बिखरे हुए ग्रामीण निवास, कुछ राज्यों में राज्य के हिस्से की राशि जारी करने में देरी, कार्यान्वयन एजेंसियों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों के पास जल आपूर्ति योजनाओं की योजना बनाने, प्रबंधित करने, संचालित करने एवं बनाए रखने की तकनीकी क्षमता की कमी, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, वैधानिक/अन्य मंजूरियों को प्राप्त करने में देरी आदि शामिल है।
जल राज्य का विषय है इसलिए, ग्रामीण घरों में नल का पानी उपलब्ध कराने के लिए पाइप जलापूर्ति योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य/केंद्र शासित क्षेत्र की है। भारत सरकार जल जीवन मिशन के अंतर्गत तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों के प्रयासों में सहायता करती है। जब कभी इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो उसे उचित सुधारात्मक उपायों के लिए संबंधित राज्य सरकार को अग्रेषित किया जाता है। इसके अलावा, मिशन के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों के माध्यम से राज्यों को अनुबंध दस्तावेजों में आवश्यक दंड को शामिल करने की सलाह दी गई है, ताकि एजेंसियों को मिशन के कार्यान्वयन में किसी प्रकार की देरी से बचने के लिए प्रेरित किया जा सके।