शिक्षिका की पूर्व सेवा की नहीं की गयी गणना, अवमानना याचिका पर DPI को नोटिस
रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग से जुड़े अवमानना मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए डीपीआई को न्यायालय के पूर्व आदेश का पालन करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। साथ ही यह स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि निर्धारित समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की बेंच में हुई।
मामला सहायक शिक्षक एल.बी. नंदिनी घृतलहरे से जुड़ा है, जो वर्तमान में शासकीय प्राथमिक शाला छतौना (मंदिर हसौद), विकासखंड आरंग, जिला रायपुर में पदस्थ हैं। उनकी पहली नियुक्ति 12 जुलाई 2008 को जनपद पंचायत गुरूर, जिला बलौद में हुई थी।वर्ष 2011 में उनके खिलाफ एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई, जिसके चलते 5 फरवरी 2013 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, वर्ष 2022 में सक्षम न्यायालय ने उन्हें आपराधिक प्रकरण से दोषमुक्त कर दिया।
दोषमुक्त होने के बाद नंदिनी घृतलहरे ने विभाग को आवेदन देकर सेवा में पुनर्बहाली की मांग की। विभाग ने उन्हें बहाल करते हुए प्राथमिक शाला छतौना में पदस्थ किया और यह भी आदेश दिया कि बर्खास्तगी से लेकर पुनः कार्यभार ग्रहण करने तक की अवधि को सेवा अवधि माना जाएगा।इसके बावजूद, शिक्षा विभाग ने उनकी सेवा का संविलियन 25 नवंबर 2024 से किया और बर्खास्तगी अवधि को संविलियन गणना में शामिल नहीं किया गया।नंदिनी घृतलहरे का संविलियन 25 नवंबर 2024 को किया गया। इस दौरान बर्खास्तगी दिनांक से कार्यभार ग्रहण की बीच के समय को संविलियन की गणना नहीं की गयी। उक्त बातों से पीड़ित होकर नंदिनी घृतलहरे ने हाईकोर्ट याचिका प्रस्तुत किया और उनकी सेवा को दिनांक 1 जुलाई 2018 से शिक्षा विभाग में संविलियन हेतु आदेश पारित करने की मांग की।
सुनवाई के बाद न्यायालय ने लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देश दिया था कि इस संबंध में निर्णय लेकर दो माह के भीतर आदेश पारित किया जाए।न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद तय समयसीमा में कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की।