भिलाई इस्पात संयंत्र में ‘लेट्स बी सेफ’ सेफ्टी लीडरशिप कार्यक्रम शुरू
रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यस्थल सुरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा ‘विज़न ज़ीरो’ यानी शून्य दुर्घटना के लक्ष्य को व्यवहारिक रूप से स्थापित करने की दिशा में मंगलवार को व्यापक सेफ्टी लीडरशिप कार्यक्रम ‘लेट्स बी सेफ’ का शुभारंभ किया गया। लार्सन एंड टुब्रो एडुटेक द्वारा विकसित और संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षा के प्रति व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, व्यवहारगत जागरूकता तथा नेतृत्व-आधारित सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कार्यपालक निदेशक (सेल सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन) रामकृष्ण, लार्सन एंड टुब्रो एडुटेक के हेड (एंटरप्राइज बिजनेस) मनोज देवपुरकर तथा मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) देबदत्त सतपथी उपस्थित रहे। संयंत्र के विभिन्न विभागों से 31 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन महाप्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) पुष्पा एम्ब्रोज ने किया, जबकि समन्वयन सहायक महाप्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) अजय टल्लू द्वारा किया गया।
अपने संबोधन में कार्यपालक निदेशक रामकृष्ण ने कहा कि कार्यस्थल सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक कर्मचारी द्वारा प्रतिदिन लिया जाने वाला जिम्मेदार और सजग निर्णय है। उन्होंने कहा कि संयंत्र में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी के साथ उसका परिवार भी जुड़ा होता है, इसलिए सुरक्षा को संगठनात्मक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने ‘लेट्स बी सेफ’ कार्यक्रम को भिलाई इस्पात संयंत्र की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण कदम बताया।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से सेल के वरिष्ठ एवं मध्य-स्तरीय नेतृत्व वर्ग के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक अनुपालन-आधारित सुरक्षा दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए व्यक्तिगत स्वामित्व, सक्रिय नेतृत्व और साझा उत्तरदायित्व पर आधारित सुरक्षा संस्कृति विकसित करना है। कार्यक्रम की रूपरेखा लार्सन एंड टुब्रो एडुटेक द्वारा संयंत्र प्रबंधन एवं विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है, जिसमें जोखिम पहचान, जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवहारगत सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को पांच प्रमुख मॉड्यूल में विभाजित किया गया है। इनमें नेतृत्व एवं प्रबंधन की भूमिका, प्रबंधन प्रणालियों में सुरक्षा का एकीकरण, व्यक्तिगत सुरक्षा प्रतिबद्धता, सुरक्षा अवलोकन एवं भूमिका निर्वहन तथा ‘विज़न ज़ीरो’ की दिशा में संगठनात्मक यात्रा जैसे विषय शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षा नेतृत्व के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया तथा कार्यस्थल पर सुरक्षित व्यवहार को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश सुरक्षा के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसके तहत “आपको सुरक्षित रहना है” जैसी पारंपरिक अवधारणा से आगे बढ़ते हुए “मैं सुरक्षा का चयन करता हूं” जैसी आत्म-प्रेरित कार्य संस्कृति विकसित करने पर बल दिया गया। पहल के माध्यम से सुरक्षा को केवल नियामकीय आवश्यकता न मानकर व्यक्तिगत मूल्य और संगठनात्मक प्रतिबद्धता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।