स्वच्छता जन-आंदोलन बने, तभी साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : सावित्री ठाकुर
रायपुर। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा है कि स्वच्छता केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है। स्वच्छ, स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वच्छता जन-आंदोलन का स्वरूप नहीं लेती, तब तक विकसित भारत का लक्ष्य पूर्ण रूप से साकार नहीं हो सकता।
केंद्रीय राज्य मंत्री बिलासपुर के पुराना बाजार, सकरी क्षेत्र में आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम में सहभागी हुईं। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, विधायक धरमलाल कौशिक तथा छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छता के प्रति अभूतपूर्व जन-जागरूकता का वातावरण निर्मित हुआ है। स्वच्छ भारत अभियान ने लोगों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। आज देश के गांवों, कस्बों और शहरों में स्वच्छता के प्रति बढ़ी जागरूकता उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व सार्वजनिक स्थलों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों तथा अन्य नागरिक सुविधाओं के आसपास स्वच्छता की स्थिति चिंताजनक रहती थी, लेकिन जनभागीदारी और सतत प्रयासों के कारण आज परिस्थितियों में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है। यह परिवर्तन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि देशवासियों के सहयोग और जागरूकता से संभव हुआ है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि स्वच्छता का वास्तविक उद्देश्य केवल सफाई अभियान चलाना नहीं है, बल्कि लोगों के मन में स्वच्छता के प्रति स्थायी चेतना विकसित करना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, कार्यस्थल, मोहल्ले और आसपास के सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने का संकल्प ले, तो स्वच्छ भारत का सपना शीघ्र ही साकार हो सकता है। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं और जन-जागरूकता से ही स्थायी परिवर्तन संभव है।
ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसकी प्राप्ति में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति से नहीं बनता, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन, स्वच्छता और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन से भी निर्मित होता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह राष्ट्रहित में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि स्वच्छता को किसी विशेष दिवस या अभियान तक सीमित न रखा जाए। इसे निरंतर चलने वाले जन-आंदोलन के रूप में अपनाया जाना चाहिए। मंदिरों, विद्यालयों, महापुरुषों की प्रतिमाओं, सार्वजनिक स्थलों, गलियों, मोहल्लों तथा सामुदायिक परिसरों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने में समाज के प्रत्येक वर्ग को सहयोग देना चाहिए। इससे न केवल स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सकारात्मक उदाहरण स्थापित होगा।