कोरबा। एक मां की सबसे बड़ी चाहत होती है कि उसका बच्चा पढ़-लिखकर बेहतर भविष्य बनाए। लेकिन जब आर्थिक तंगी ही सपनों के रास्ते में खड़ी हो जाए, तो चिंता और बेबसी दोनों बढ़ जाती हैं। कुछ ऐसी ही चिंता लेकर कोरबा की एक मां जनदर्शन में पहुंची थी। उसे डर था कि कहीं संसाधनों की कमी उसकी नन्ही बेटी की पढ़ाई में बाधा न बन जाए। लेकिन जनदर्शन में उसकी मुलाकात ऐसे प्रशासनिक संवेदनशीलता से हुई, जिसने उसकी चिंता को मुस्कान में बदल दिया।
पुरानी बस्ती, रानी रोड निवासी सुप्रिया मतवानी ने कलेक्टर कुणाल दुदावत के समक्ष अपनी परेशानी रखी। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी इस सत्र में केजी-1 में प्रवेश लेने जा रही है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि स्कूल ड्रेस, किताबें, कॉपियां, बैग और अन्य जरूरी सामग्री खरीदी जा सके। एक मां के चेहरे पर बेटी की पढ़ाई को लेकर चिंता साफ झलक रही थी। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मामले को सिर्फ एक आवेदन के रूप में नहीं देखा, बल्कि एक बच्ची के भविष्य से जुड़ा विषय मानकर तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने भी तेजी दिखाते हुए बच्ची के लिए स्कूल गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, स्कूल बैग और जूतों की व्यवस्था कर दी। जब बच्ची के हाथों में नया स्कूल बैग और पढ़ाई की सामग्री पहुंची, तो मां की आंखों में राहत और चेहरे पर संतोष दिखाई दिया। जिस परिवार के लिए ये सामान जुटाना मुश्किल था, उसके लिए यह मदद किसी बड़ी सौगात से कम नहीं थी। सुप्रिया मतवानी ने जिला प्रशासन और कलेक्टर का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का समाधान इतनी जल्दी हो जाएगा। वहीं जनदर्शन में मौजूद लोगों ने भी इस पहल को प्रशासन की संवेदनशीलता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
यह केवल शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की कहानी नहीं है, बल्कि उस भरोसे की कहानी है जो आम लोगों को प्रशासन से जोड़ता है। यह संदेश भी है कि आर्थिक अभाव किसी बच्चे की शिक्षा के रास्ते में दीवार नहीं बनना चाहिए। कोरबा में जनदर्शन लगातार आम लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रभावी मंच बनता जा रहा है। सोमवार को सामने आई यह तस्वीर बताती है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता के साथ काम करता है, तो एक छोटी-सी पहल भी किसी परिवार के लिए बड़ी राहत और किसी बच्चे के लिए सुनहरे भविष्य की शुरुआत बन सकती है।