छत्तीसगढ़

सौम्या चौरसिया के मां की संपत्ति को आयकर विभाग ने किया अटैच... जमानट याचिका पर सुनवाई 23 सितंबर को

रायपुर। कोयला लेव्ही स्कैम में आरोपी सौम्या चौरसिया की ज़मानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार 23 सितंबर को सुनवाई करेगा। 20 सितंबर को ही इसकी सुनवाई होनी थी लेकिन ईडी ने जवाब के लिए समय ले लिया। इधर आयकर विभाग ने सौम्या चौरसिया की मां शांति चौरसिया से जुड़ी संपत्तियों को अटैच कर दिया है।

आयकर विभाग ने जिन संपत्तियों पर अटैचमेंट का बोर्ड लगाया है, उनमें जोरा ( रायपुर) में 26 हजार स्क्वायर फ़ीट ज़मीन,रायपुर के आरंग तहसील के रसनी गांव में साढ़े छ एकड़ ज़मीन,आरंग में 3.8 एकड़ ज़मीन और मंदिर हसौद में क़रीब साढ़े तीन एकड़ ज़मीन शामिल है।इन संपत्तियों का लाभार्थी सौम्या चौरसिया को बताया गया है। इनमें तीन संपत्तियाँ सौम्या चौरसिया की माँ शांति चौरसिया के नाम पर जबकि एक संपत्ति भीखम चंद्र चांडक के नाम पर बताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में सौम्या की याचिका पर सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस भुइयाँ की बेंच करेगी। सौम्या चौरसिया की याचिका में ज़मानत के लिए आप पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया के मामले में दिए गए ज़मानत आदेश को आधार बनाया गया है। सौम्या चौरसिया की ओर से दायर याचिका में याचना की गई है कि,वह एक साल आठ महीने से जेल में है,प्रकरण का ट्रायल जल्द होने की संभावना नहीं है। जेल में रहते हुए ईडी ने बीते एक साल में कभी इस प्रकरण में पूछताछ भी नहीं की जिसका अर्थ है कि, ईडी को अब सौम्या से इस प्रकरण में पूछताछ की जरुरत भी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को ज़मानत देते हुए यह कहा था कि, ट्रायल में विलंब संविधान की धारा 21 की अवहेलना है। संविधान की धारा 21 ईडी की धारा 45 से उपर महत्व रखते हुए विचारणीय होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर मनीष सिसोदिया को ज़मानत दे दी थी। सौम्या चौरसिया की ज़मानत याचिका में मनीष सिसोदिया की ज़मानत याचिका में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए इस न्याय दृष्टांत का ज़िक्र है।

आयकर विभाग ने सौम्या चौरसिया की माँ शांति चौरसिया से जुड़ी बताई जा रही संपत्तियों को अटैच कर दिया है। आयकर विभाग ने अटैच संपत्तियों पर अटैचमेंट का बोर्ड लगा दिया है। इसके पहले आयकर विभाग ने सौम्या चौरसिया से जुड़ी संपत्तियों को भी अटैच किया है। आयकर विभाग के अटैचमेंट का अर्थ है कि, अटैच संपत्तियां ना बेची जा सकती हैं ना ख़रीदी जा सकती हैं ना ही किसी को किराए पर दी जा सकती हैं।