प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था तो कम नहीं होगी: अजय काले
2026-06-28 06:30 PM
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0- महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष ने कहा- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहने की जरूरत
रायपुर। अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। जिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की सेवा में चांदी की ईंट दान स्वरूप दी थी, वह सभी सुरक्षित हैं। इधर स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) की बड़े पैमाने पर जांच जारी है। पहले चरण की जांच की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर करने के साथ ही आठ लोगों की गिरफ्तारी की चुकी है और भी कुछ गिरफ्तारियां संभावित हैं। दोषियों का सलाखों के पीछे जाना तय है।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने इस आशय के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले का आशय यह नहीं कि हमारी प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था कम हो जाए। भगवान श्रीराम चंद्र को काल्पनिक बताने वाले नास्तिकों की बातों में आकर अगर हम ही अयोध्या चढ़ावा प्रकरण को लेकर मंदिर की व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे, तो हम कहां के सनातनी और काहे के श्रद्धालु। काले ने कहा कि 11 जुलाई को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट की बैठक में बहुत सी नई व्यवस्थाएं अस्तित्व में आएंगी। तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर सीईओ नियुक्ति की खबर भी है, ताकि मंदिर में दान में मिलने वाली राशि का न केवल सुक्ष्मतम हिसाब रखा जा सके, बल्कि दान राशि का व्यवस्थित नियोजन भी हो सके।
काले के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की महिमा ही है कि अयोध्या में प्रतिदिन लाखों तीर्थयात्री आते हैं।उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया कराई गईं हैं। अयोध्या समेत आसपास के इलाकों का अकल्पनीय विकास हुआ है और अभी भी जारी है। हजारों लोगों को लगातार रोजगार के नए- नए अवसर मिल रहे हैं। इन सब के बीच हम मानते हैं कि अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी जघन्य व अक्षम्य अपराध है और अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी ही चाहिए। साथ ही अयोध्या मंदिर में एक ऐसी व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए कि कोई उचक्का वहां दान में मिली धनराशि पर बुरी नजर न डाल सके।
अजय मधुकर ने कहा कि इसके बावजूद भी अगर हमारी नाराजगी यथावत है, तो ये नाराजगी मंदिर ट्रस्ट के प्रति होनी चाहिए, प्रभु श्रीराम के प्रति नहीं। हम मंदिर न्यास ट्रस्ट के पदाधिकारियों से रुष्ट हो सकते हैं, मर्यादा पुरुषोत्तम से नहीं। हमारा व्यवहार हर हाल में ऐसा हो, जिससे सनातन मजबूत हो और हमारी भावी पीढ़ी की धर्म- आध्यात्म, भगवान, मंदिरों के प्रति आस्था गहरी हो। अयोध्या राम मंदिर के खिलाफ सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया से लेकर विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर नकारात्मक बातें की जा रही हैं। रील्स के माध्यम से गलत व आपत्तिजनक जानकारी दी जा रही है, भ्रामक स्थिति निर्मित की जा रही है। ऐसे में हमारा नैतिक व आध्यात्मिक दायित्व यह भी है कि हम अपने परिवार, पास- पड़ोसियों, खासकर युवाओं को भ्रामक व प्रोपोगेंडा फैलाने वालों तत्वों से अप्रभावित रहने और इस पूरे मामले में सकारात्मक बने रहने की सीख दें।