हाईवे पर 100 किमी प्रति घंटे चलने का नियम, 70 पर ही काट दिए चालान; तीन मामले एनएचएआई के पास पहुंचे
2026-06-28 12:50 PM
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वाराणसी| हाईवे पर 100 किमी प्रति घंटे की निर्धारित गति सीमा के बावजूद 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर चालान काटे जाने के तीन मामले सामने आए हैं। शिकायतें एनएचएआई तक पहुंची हैं। वाहन चालकों का आरोप है कि हाईवे पर गति सीमा संबंधी नियमों की स्पष्ट जानकारी और पर्याप्त संकेतक नहीं लगाए गए हैं।
आजमगढ़- वाराणसी नेशनल हाईवे पर 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने का नियम है, फिर भी 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाले वाहनों का चालान कर दिया गया। तीन मामले एनएचएआई के पास पहुंचे हैं। इनमें कहा गया है कि हाईवे पर गति सीमा का नियम कहीं नहीं लिखा है। हाईवे खाली रहता है तो गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। इसके बावजूद 15 और 27 जून को 2000-2000 रुपये के चालान काट दिए गए।
हर महीने कट रहे औसतन 250 से ज्यादा चालान: हाईवे के साथ ही शहर के प्रमुख चौराहों, रिंग रोड और हाईवे पर स्थापित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिये ओवरस्पीडिंग में हर महीने औसतन 250 से ज्यादा चालान काटे जा रहे हैं। लेकिन इस आधुनिक व्यवस्था के पीछे एक कड़वी सच्चाई यह है कि जरूरी गति सीमा का ब्योरा कहीं नहीं लिखा गया है। जागरूकता बोर्ड भी नहीं लगे हैं। दुर्घटना बहुल क्षेत्र के संकेतक जरूर लगे हैं।
हेल्पलाइन पर एक ही जवाब- जहां चालान हुआ वहां कोई स्कूल या गांव रहा होगा: हेल्पलाइन नंबर 1033 से बस इतनी ही जानकारी मिलती है कि जहां चालान हुआ वहां कोई स्कूल या गांव रहा होगा वहां गति सीमा 70 से कम होती है जबकि बाहर से आने वाले वाहन चालकों का कहना है कि उन्हें इस बात की समय पर जानकारी ही नहीं मिल पाती कि किस जगह पर गति सीमा क्या तय की गई है।
हाईवे पर वाहन तेज गति से चलते हैं। अचानक कोई स्कूल, अस्पताल या ग्रामीण आबादी वाला क्षेत्र आ जाता है तो वहां गति कम करने का कोई स्पष्ट बोर्ड होना चाहिए। रफ्तार में ही वाहन निकल जाते हैं फिर मोबाइल फोन पर चालान का मेसेज आ जाता है।
एनएच-19 पर 21 एआई कैमरे, पांच काशी सीमा में
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने व आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वाराणसी से औरंगाबाद तक 21 एआई कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से पांच वाराणसी सीमा में हैं। डाफी टोल प्लाजा पर विशेष डिस्प्ले लगाया गया है जहां मौसम और गति से जुड़ी जानकारी दी जाती है।
21 चौराहों पर लगे कैमरे
शहर के 21 से ज्यादा चौराहों पर आईटीएमएस, चार स्थानों पर गति कैमरे यातायात नियमों का पालन कराने के लिए लगे हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत स्थापित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के जरिये प्रमुख चौराहों और सड़कों पर चौबीसों घंटे निगरानी होती है।
एएनपीआर पढ़ते हैं नंबर प्लेट
शहर में रेड लाइट वायलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए हैं। एएनपीआर कैमरे गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ते हैं। चार स्थानों पर स्पीड वायलेशन डिटेक्शन सिस्टम (एसवीडीएस) लगाए गए हैं जो निर्धारित गति से अधिक चलने वाले वाहनों की पहचान कर ई-चालान करते हैं।
ये हैं मानक
आजमगढ़ से गोरखपुर (एनएच-233) और वाराणसी से कोलकाता (एनएच-2) पर वाहनों की गति सीमा तय है लेकिन कहीं भी ऐसा संकेतक नहीं लगा है कि शहरी या ग्रामीण क्षेत्र है। कहां गति कम रखनी है। इसी चक्कर में ज्यादा चालान काटे जा रहे हैं। नियमों की जानकारी भी नहीं दी गई है।