दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्‍ट्र मंडल में ‘सेलि‍ब्रेशन’ से पहले सेलिब्रेशन

  ‘भूल-चूक लेनी देनी’ नाटक के मंचन की पार्टी के साथ मनाया गया गुरुपूर्णिमा पर्व, अनिल- अपर्णा कालेले सम्‍मानित

रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल परिसर में गुरुपूर्णिमा पर वरिष्‍ठ रंगसाधक, निर्देशक और आजीवन सभासद प्रा. अनिल श्रीराम कालेले और उनकी पत्‍नी अपर्णा कालेले का सम्‍मान किया गया। महाराष्‍ट्र मंडल के रंगमंचीय कलाकारों से सजे इस आत्‍मीय आयोजन में आगामी तीन अक्‍टूबर को संत ज्ञानेश्‍वर सभागृह के कुमुदिनी वरवंडकर स्‍मृति रंगमंच पर होने वाले मराठी नाटक ‘सेलिबेशन’ की तैयारियों और रिहर्सल पर भी चर्चा की गई।

निर्देशक अनिल कालेले ने कहा कि महाराष्‍ट्र मंडल के नाटक का स्‍वर्णिम इतिहास रहा है और यहां मंचित किए गए अनेक नाटकों को आज भी गर्व के साथ याद किया जाता है। मुझे उम्‍मीद है कि आप सभी की प्रतिभा और समर्पित भाव से की गई मेहनत से सजा नाटक ‘सेलिबेशन’ भी महाराष्‍ट्र मंडल के इतिहास और रंगमंच की दुनिया में मील का पत्‍थर साबित होगा। प्रा. कालेले ने इस नाटक के माध्‍यम से रंगमंच पर पदार्पण करने वाले युवा कलाकार प्रांजल बक्षी, अथर्व महावादी और वरिष्‍ठ सभासदों रवि किरण दशपुत्रे व गणेशा जाधव पाटिल का स्‍वागत किया और उनके उज्‍जवल भविष्‍य की कामना की। 

  

‘सेलिबेशन के निर्देशक व भाई की केंद्रीय भूमिका निभा रहे प्रसन्‍न विजय निमोणकर ने बताया कि इस नाटक 'सेलिब्रेशन' के प्रिया बक्षी, गौरी क्षीरसागर, सुधांशु नाफडे़, कीर्ति हिशीकर, कुंतल कालेले, रविंद्र ठेंगड़ी सहित सभी कलाकार विभिन्‍न पात्रों के लिए न केवल फाइनल हो चुके हैं, बल्कि कई हफ्तों से नाटक की रिहर्सल भी कर रहे हैं। नाटक की तालीम और तैयारियां तीन अक्‍टूबर तक नियमित, अनुशासनबद्ध, निर्बाध और पूरे समर्पण के साथ होती रहे, इस आशय की शपथ सभी कलाकारों ने प्रा. अनिल कालेले के समक्ष ली। निमोणकर ने बताया कि ‘सेलिबेशन’ नाटक के प्रयोग से पहले यह सेलिबेशन असल में पुरानी पंरपरा का निर्वहन मात्र है। असल में यह पार्टी हमारे पिछले मराठी नाटक ‘भूल चूक घ्‍यावी द्यावी’ (भूल चूक लेनी देनी) के सफल मंचन की है। यह नाटक महाराष्‍ट्र मंडल में ही गणेशोत्‍सव के दौरान दर्शकों से खचाखच भरे संत ज्ञानेश्‍वर सभागृह में किया गया था।

पहली बार मराठी नाटक में काम कर रहे रवि किरण दशपुत्रे, गणेशा जाधव पाटील, अथर्व महावादी, प्रांजल बक्षी इस मौके पर रिहर्सल के दौरान अपने अनुभव भी शेयर किए। सभी कलाकारों ने निर्देशक निमोणकर के साथ अब सीधे मंच पर ‘सिलेबेशन’ की रिहर्सल करने की उत्‍सुकता दिखाई। नाटक के कलाकारों और उनके परिजनों ने वर्तिका क्षीरसागर का भी जन्‍मदिन धूमधाम से मनाया। विभिन्‍न नाटकों के मजेदार किस्‍सों और हंसी- ठिठोली के बीच स्‍वरुचि भोज के साथ गुरुपूर्णिमा उत्‍सव के समापन की घोषणा की गई।

इस अवसर पर नाटक के सभी कलाकारों व उनके स्‍वजनों वंदना निमोणकर, प्रशांत बक्षी, नुपुर गुप्‍ते, सुधांशु गुप्‍ते, भगीरथ कालेले, परितोष डोनगांवकर, निलिमा डोनगांवकर, प्रवीण क्षीरसागर, नवीन देशमुख, अर्पिता देशमुख, सुधीर नाफड़े, सुहासिनी नाफड़े, पल्लवी नाफड़े, रचना ठेंगड़ी सहित हर आयुवर्ग के अनेक लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।